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शिक्षण सहायक सामग्री का कक्षा में उपयोग | Teaching Learning Material - TLM

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके साथ शिक्षण सहायक सामग्री का कक्षा में कैसे उपयोग किया जाता है। शिक्षण सहायक सामग्री क्यों आवश्यक है, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।

दोस्तों आप सभी लोगों को पता है कि Teacher Exam मैं शिक्षण सहायक सामग्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है शिक्षण सहायक सामग्री से प्रत्येक Teacher Exam मैं एक से 2 Question जरूर पूछे जाते हैं।

और इन प्रश्नों को सही कराने का हमारा उद्देश्य है हमारा यह भी उद्देश्य है कि आप जो भी सामग्री यहां से पढ़ें वह बिल्कुल सही और सटीक हो हम आपके लिए जो भी सामग्री उपलब्ध करवाते हैं उसमें हम कोई भी लापरवाही नहीं दिखाते।

दोस्तों आज की यह पोस्ट अगर आप लोगों ने दो या तीन बार पढ़ ली तो मेरा पूरा विश्वास है कि आपका परीक्षा मे शिक्षण सहायक सामग्री से एक भी प्रश्न नहीं छूटेगा।


शिक्षण सहायक सामग्री का कक्षा में उपयोग | Teaching Learning Material - TLM



शिक्षण सहायक सामग्री क्या है


छात्रों में अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करने व ज्ञान को स्थाई बनाने के लिए शिक्षक को शिक्षण कार्य के दौरान अनेक प्रकार के साधनों का प्रयोग करना पड़ता है।

अतः वह साधने जो अध्यापक की उद्देश्य पूर्ति व विद्यार्थियों के अधिगम में सहायक होते हैं वे सहायक साधन या शिक्षण सहायक सामग्री कहलाते हैं इनको हम श्रव्य दृश्य सामग्री भी कहते हैं।


शिक्षण सहायक सामग्री का उद्देश्य

श्रव्य दृश्य सामग्री के उपयोग को स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा आयोग / कोठारी आयोग (1964-66) रिपोर्ट में लिखा है किस शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में सहायक सामग्री उपलब्ध कराना अति आवश्यक है।

दौलत सिंह कोठारी ने कहा कि शिक्षण सहायक सामग्री वास्तव में अपने देश में शैक्षिक क्रांति ला सकती है।


दौलत सिंह कोठारी 

दौलत सिंह कोठारी राजस्थान के उदयपुर जिले के थे। बे भारत रक्षा मंत्रालय में रक्षा सलाहकार थे। दौलत सिंह कोठारी UGC अध्यक्ष थे।

दौलत सिंह कोठारी को प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक कहा जाता है।

इन की पुस्तक का नाम न्यूक्लियर एक्सप्लोजन एंड देयर इफेक्ट्स है।


श्रव्य दृश्य सामग्री का प्रतिभाशाली और मंदबुद्धि बालकों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

श्रव्य दृश्य सामग्री प्रतिभाशाली और मंदबुद्धि दोनों ही बालकों के लिए आवश्यक है इससे प्रतिभाशाली बालकों के चिंतन में गति व स्पष्टता आती है। तथा मंदबुद्धि बालकों में सूक्ष्म प्रत्ययो सूत्रों सिद्धांत को स्थूल रूप में समझने की क्षमता का विकास होता है।


शिक्षण सहायक सामग्रियों के प्रकार

1. इंद्रियों के आधार पर 

शिक्षण सहायक सामग्रीया  इंद्रियों के आधार पर तीन प्रकार की होती है।

A. दृश्य सामग्री  B. श्रव्य सामग्री  C. दृश्य-श्रव्य सामग्री


2. तकनीक के आधार पर

शिक्षण सहायक सामग्री या तकनीक के आधार पर दो प्रकार की होती हैं।

A. साफ्टवेयर / मृदु उपागम / 

B. हार्डवेयर / कठोर उपागम


3. प्रक्षेपण के आधार पर 

प्रक्षेपण के आधार पर शिक्षण सहायक सामग्री दो प्रकार की होती हैं।

A. प्रक्षेपी सामग्री

B. अप्रेक्षी सामग्री


4. N.C.E.R.T के आधार पर

1. ग्राफिक्स सामग्री - चित्र , कॉमिक्स , कार्टून

2. डिस्प्ले सामग्री (प्रदर्शन सामग्री) -  श्यामपट्ट , बुलेटिन बोर्ड , फ्लेनल बोर्ड

3. त्रिआयामी सामग्री - मॉडल , वास्तविक पदार्थ

4. श्रव्य सामग्री - रेडियो , टेपरिकार्डर , लिंग्वाफोन

5. प्रक्षेपी सामग्री - स्लाइड , फिल्म , स्ट्रिप

6. प्रक्रिया सामग्री - अभिनय , व्रत चित्र , क्षेत्र भृमण


शिक्षण अधिगम सहायक सामग्रियों की सापेक्ष प्रभावशीलता को एडमर डेल ने दिया।

एडमर डेल की पुस्तक - ऑडियो विजुअल मेथड ऑफ टीचिंग


प्रमुख शिक्षण सहायक सामग्री

1. श्यामपट्ट - दृश्य सामग्री / डिस्प्ले सामग्री

  श्यामपट्ट के निर्माता - विलियम जेम्स

  श्यामपट्ट का आकार - आयताकार

 श्यामपट्ट पर लिखते समय 45 डिग्री का कोण बनना चाहिए।

श्यामपट्ट पर मिटाते समय ऊपर से नीचे की ओर चला जाता है।

शिक्षक का परम मित्र श्यामपट्ट है। यह पारम्परिक सामग्री है।


2. वास्तविक पदार्थ / प्रत्यक्ष वस्तु

शिक्षा सहायक सामग्रियों में प्रथम महत्व प्रत्यक्ष वस्तु का होता है।

3. मॉडल / प्रतिमान /  प्रतिदर्श

मॉडल त्रिविमीय आकृति होती है। इसे हम किसी भी वस्तु विशेष की फोटोकॉपी कह सकते हैं।

मॉडल दो प्रकार का होता है। 

A. गतिशील मॉडल 

B. अगतिशील मॉडल

रेआलिया क्या है 

यह शब्द उन वास्तविक वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता है जिनका निर्माण किसी संस्कृति विशेष या समाज विशेष के लोग करते हैं वह अपने लिए उपयोग करते हैं।

जैसे - बर्तन , ओजार , वस्त्र , कलाकृतियां , खेती के उपकरण


डायोरामा क्या है

डायोरामा उन त्रिविमीय दृश्यों को कहते हैं जिन्हें कोई समाज व संस्कृति के लोग किसी मूलभूत मानवीय क्रियाएं विशिष्ट जीवन पद्धतियों के आधार पर बनाते हैं।


4. चित्र / मानचित्र / चार्ट

चित्र , मानचित्र , चार्ट के माध्यम से शिक्षक बच्चों को भौगोलिक दृश्य को एक पन्ने पर उकेरता करता है। फिर उस चित्र के माध्यम से बच्चों को अपनी भाषा में समझाने का प्रयास करता है।


5. रेखा चित्र

अध्यापक द्वारा चौक की सहायता से श्यामपट्ट पर या विद्यार्थी द्वारा पेन की सहायता से बनाया गया चित्र रेखाचित्र कहलाताहै रेखाचित्र गणित में महत्वपूर्ण है।


6. फिल्म स्ट्रिप 

फिल्म स्ट्रिप की साइज 35mm होती है। यह स्थिर चित्र होते हैं। फिल्म स्ट्रिप सैलूलोज एसिटेट की बनी होती है यह एक प्रक्षेपी सामग्री है।


7. फ्लैनल बोर्ड / फलालीन बोर्ड

यहां एक दृश्य सामग्री है यह बोर्ड कक्षा कक्ष में शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों को श्रेष्ठ अधिगम रुचि पूर्ण अधिगम के लिए चित्रों को प्रदर्शित करने के काम में लिया जाता है। इस बोर्ड पर बने चित्र खुर्ददुरे होते हैं। इस बोर्ड पर फलालीन का कपड़ा लगा होता है।


8. बुलेटिन बोर्ड / प्रदर्शन बोर्ड / विज्ञप्ति बोर्ड

बुलेटिन बोर्ड विद्यालय में ऐसी जगह पर लगाया जाता है जहां पर सभी विद्यार्थियों की दृष्टि आसानी से जा सके। विद्यालय में सूचनाएं व नवनीततम सामाजिक व राजनीतिक समाचार अभिव्यक्ति को प्रदर्शित करने के लिए बुलेटिन बोर्ड का उपयोग किया जाता है।


9. सेक्सटेंट 

इसका उपयोग भूगोल व गणित में आंखों की स्तर पर बने कोण को मापने में किया जाता है यह एक दृश्य सामग्री है।


10. लिंग्वा फोन

यहां एक श्रव्य सामग्री है विद्यालय में भाषा शिक्षण के दौरान बालकों का उच्चारण संबंधी दोष दूर करने के लिए लिंगवा फोन का प्रयोग किया जाता है इस यंत्र में अध्यापक द्वारा रिकॉर्ड आदर्श वाचन होता है। इससे बालकों की उच्चारण संबंधी दोषों को दूर किया जाता है।


11. ग्रामोफोन

यह एक श्रव्य सामग्री है। विद्यालय में बालकों को गीत संगीत की शिक्षा देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।


12. रेडियो

रेडियो के जनक मारकोनी थे। यहां विद्युत चुंबकीय तरंगों द्वारा आयोजित सिग्नलओ को ग्रहण करने का साधन है।


13. टेप रिकॉर्डर

यहां एक श्रव्य सामग्री है जिसका उपयोग सुनने के लिए किया जाता है।


14. टेलीविजन 

टेलीविजन  का आविष्कार जे एल बेयर्ड ने किया था।


15. क्षेत्र भ्रमण

क्षेत्र भ्रमण के द्वारा विद्यार्थियों में प्रत्यक्ष व स्थाई ज्ञान प्राप्त होता है।

16. व्रत चित्र 

यहां एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है और दृश्य श्रव्य सामग्री है



प्रक्षेपण यंत्र ( प्रोजेक्टर ) क्या है 

प्रोजेक्टर एक प्रक्षेपण यंत्र है यह दृश्य सामग्री है।

प्रोजेक्टर का उपयोग छोटे चित्रों को बड़ा करने के लिए किया जाता है।

प्रोजेक्टर के उपयोग के समय कमरे में अंधेरा होना चाहिए।

 प्रोजेक्टर में वल्व ,  लैंस , कांच का प्रयोग होता है।


प्रोजेक्टर के प्रकार

प्रोजेक्टर पांच प्रकार के होते है।

1. मैजिक लेंटर्ड /  जादू की लालटेन / डायस्कोप / पारदर्शी प्रोजेक्टर

इस प्रोजेक्टर के माध्यम से कांच की पारदर्शी स्लाइड पर बने चित्रों को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जाता है।

सबसे पहले कांच की स्लाइड को साबुन से धोकर जिलेटिन के घोल में डुबोकर सुखाया जाता है फिर क्षेत्र बनाए जाते हैं।


2. एपिस्कोप

यह एक दृश्य सामग्री है इस यंत्र के द्वारा कोइ लिखित सामग्री ,  छोटे पदार्थों व सूक्ष्म जीवों को बिना किसी माध्यम से सीधे ही प्रक्षेपित किया जा सकता है।


3. एपिडायस्कोप

यह एक अपारदर्शी व पारदर्शी प्रोजेक्टर है इस यंत्र के माध्यम से कांच की पारदर्शी स्लाइडो पर बने चित्रों को बड़े करके प्रक्षेपित करने के अलावा किसी सूक्ष्म पुस्तक पर बने चित्र को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जा सकता है।


4.शिरोपरि प्रक्षेपण यंत्र / O.H.P प्रोजेक्टर

इस यंत्र के माध्यम से प्लास्टिक की सीटों पर बने चित्रों को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जाता है। प्लास्टिक की यह सीट ट्रांसप्रेंसिया कहलाती है।


5. L.C.D प्रोजेक्टर / Liquid Gystal Display

कंप्यूटर व इंटरनेट से शिक्षा देने के लिए मुख्यतः इन प्रोजेक्टर का प्रयोग किया जाता है इन प्रोजेक्टर की क्षमता की इकाई लुमिनेंस होती है यह दोनों अत्याधुनिक प्रोजेक्टर हैं।




दोस्तों इस पोस्ट को पड़ने के बाद आप अपने रुझान कमेंट द्वारा हमे बताये की आपको ये पोस्ट किसी लगी.





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