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भारतीय राजव्यवस्था - भारतीय संविधान के विकास का संक्षिप्त इतिहास | Indian Polity - Brief History Of Development Of Indian Constitution


भारतीय संविधान के विकास का संक्षिप्त इतिहास | Indian Polity - Brief History Of Development Of Indian Constitution





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भारतीय संविधान के विकास का संक्षिप्त इतिहास



1726 का चार्टर अधिनियम

  • कोलकाता ,बंबई और मद्रास प्रेसिडेंसीयों के राज्यपाल एवं उनकी परिषद को विधायी अधिकार प्रदान किए गए।
  • अब तक यह शक्ति कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में थी।

1773 का रेग्युलेटिंग अधिनियम

  • रेग्युलेटिंग अधिनियम के द्वारा बंगाल के गवर्नर को बंगाल का गवर्नर जनरल बना दिया गया।
  • कोलकाता के गवर्नर को बंगाल बिहार एवं उड़ीसा के लिए भी विधि बनाने के अधिकार दे दिए गए।
  • दीवानी अनुदान की फलस्वरुप कंपनी बंगाल बिहार और उड़ीसा प्रांत की वास्तविक शासक बन गई।
  • रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा कोलकाता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई और कोर्ट को दीवानी, फौजदारी ,नौसेना तथा धार्मिक मामलों की सुनवाई एवं फैसले का अधिकार प्राप्त हो गया।
  • रेग्युलेटिंग एक्ट के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और तीन अपर न्यायाधीश होते थे।
  • सुप्रीम कोर्ट के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजाह इम्पे को बनाया गया। और अन्य तीन न्यायाधीश चेम्बर्स , लिमेस्टर और हाइड को बनाया गया था।
  •  सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कंपनी पर नियंत्रण सशक्त हो गया।
  • इस एक्ट के तहत राजस्व नागरिक और सैन्य मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना आवश्यक कर दिया गया।
  • भारत के पहले गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स को बनाया गया था।

1784 का पिट्स इंडिया अधिनियम

  • पिट्स इंडिया अधिनियम को एक्ट ऑफ सेटलमेंट के नाम से भी जाना जाता है।
  • राजनीतिक मामलों की प्रबंधन के लिए नियंत्रण बोर्ड का गठन किया गया था
  • इस एप्स के द्वारा द्वैध शासन की व्यवस्था का आरंभ किया गया।
  • रेगुलेटिंग एक्ट की बुराइयों को दूर करने के लिए कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे अन्याय को खत्म करने के लिए इस अधिनियम को लाया गया था।
  • इस अधिनियम के तहत व्यापारिक मामलों के लिए कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर के पद बनाए गए।

1813 का चार्टर अधिनियम
  • 1813 का चार्टर अधिनियम के द्वारा कंपनी के भारतीय व्यापार के एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया था।
  • लेकिन पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार के लिए 20 वर्षों तक एकाधिकार प्राप्त रहा। इसलिए इस अधिनियम के द्वारा कंपनी के अधिकार पत्र को 20 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था।

1833 का चार्टर अधिनियम

  • 1833 का चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के व्यापारिक अधिकार पूर्णता समाप्त कर दिए गए थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा पूरे देश में एक केंद्रीय शासन प्रणाली की शुरुआत की गई।
  • 1833 का चार्टर अधिनियम के द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया।
  • 1833 का चार्टर अधिनियम के द्वारा प्रथम विधि आयोग की स्थापना हुई।
  • इस अधिनियम के द्वारा चीन के साथ चाय के व्यापार को समाप्त कर दिया गया था।
  • सिविल सेवा आयोग की प्रतियोगिता का प्रयास 1833 के चार्टर अधिनियम से हुआ।

1853 का चार्टर अधिनियम

  • इस अधिनियम के द्वारा बंगाल में नए गवर्नर की नियुक्ति की गई।
  • इस अधिनियम के द्वारा मैकाले समिति की नियुक्ति की गई।

1858 का भारत परिषद अधिनियम
  • इस अधिनियम के द्वारा भारत में वायसराय का शासन प्रारंभ हुआ था।
  • 1858 में भारत सचिव का शासन प्रारंभ किया गया।
  • इस अधिनियम के द्वारा भारत के शासन को कंपनी के हाथों से हटा दिया गया और इंग्लैंड के सम्राट के नाम किया।
  • इस अधिनियम के द्वारा द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त किया गया।

1861 का भारत परिषद अधिनियम
  • किस अधिनियम के द्वारा वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई।
  • इस अधिनियम में विभागीय पद्धति शुरू की गई।
  • केंद्रीय सरकार को सार्वजनिक ऋण,वित्त,मुद्रा डाक एवं तार आदि के संबंध में प्रांतीय सरकार से अधिक अधिकार दिए गए।

1865 का अधिनियम

  • इस अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल के विधायी अधिकारों में वृद्धि की गई।

1876 का शाही उपाधि अधिनियम

  • 1876 में भारत के वायसराय लॉर्ड लिटन थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा 24 अप्रैल 1876 को महारानी विक्टोरिया को भारत की साम्राक्षी घोषित किया गया।
  • 1876 में ब्रिटेन भारत का उप निवेशक बन गया।
  • 1876 में नियम बनाने की शक्ति भारत के वायसराय और भारत राज्य सचिव के हाथों में थी।
  • 1 जनवरी 1877 को दिल्ली दरबार का आयोजन किया गया।
  • 1 जनवरी को ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार पूर्ण तरह समाप्त कर दिए गए और इसे औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया।

1892 का भारत परिषद अधिनियम

  • इस अधिनियम के आधार पर भारत में पहली बार अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली का प्रारंभ हुआ। परिषद को बजट व अन्य वित्तीय अधिकारों पर बहस करने की शक्ति दी गई।
  • केंद्रीय विधान परिषद में कम से कम 10 तथा अधिकतम सदस्य की संख्या 16 निर्धारित की गई।

1909 का भारत परिषद अधिनियम

  • इस अधिनियम को मार्ले-मिंटो सुधार अधिनियम कहा जाता है। भारत के सचिव मार्ले थे और भारत के वायसराय लॉर्ड मिंटो थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई।
  • इस अधिनियम के द्वारा भारत राज्य सचिव एवं वायसराय की कार्यकारिणी में भारतीयों को नियुक्ति दी गई।
  • वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में सम्मिलित होने वाले पहले भारतीय सत्येंद्र नाथ सिन्हा थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा प्रांतीय विधान परिषद की संख्या में वृद्धि की गई।
Note - लॉर्ड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है।

1919 का भारत परिषद अधिनियम

  • इस अधिनियम को मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारक अधिनियम कहा जाता है।
  • 1919 में भारत के सचिव मांटेग्यू थे। और भारत के वायसराय चेम्सफोर्ड थे।
  • इस अधिनियम के तहत प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली की शुरुआत की गई।
  • इसके अंतर्गत सभी विषयों को दो भागों में वर्गीकृत किया गया।
  • आरक्षित - विषय का प्रशासन गवर्नर जरनल देखते थे।
  • हस्तांतरित - विषय का प्रशासन जनरल गवर्नर और उसके सहायक मंत्री देखते थे। जो विधान परिषदों के प्रति उत्तरदाई थे।
  • इस अधिनियम के द्वारा केंद्र में द्विसदनात्मक विधायक का गठन किया गया। राज्यसभा और लोक सभा का
  • 1919 के भारत परिषद अधिनियम के अंतर्गत महिलाओं को वोट देने का अधिकार प्राप्त हुआ।
  • इस अधिनियम के द्वारा भारत राज्य सचिव को यह अधिकार दिया गया कि वहां महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कर सकता है।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत भारत में उत्तरदाई सरकार की स्थापना हुई।
  • लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान 1919 में हुआ।

Note - प्रांतों में द्वैध शासन के जनक लियोनस कर्टियस थे।

1935 का भारत परिषद अधिनियम
  • इस अधिनियम के द्वारा अखिल भारतीय संघ की स्थापना की बात की जिसे सभी वेटस राज्यों और प्रांतों में सम्मिलित किया गया।
  • इस अधिनियम के द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर दिया गया लेकिन केंद्र में लागू कर दिया गया।
  • इस अधिनियम के द्वारा प्रांतों को स्वायत्तता या स्वतंत्रता प्रदान की।
  • इस अधिनियम के द्वारा वर्मा को भारत से अलग कर दिया गया।
  • भारत में भारतीय वित्तीय व्यवस्था को संचालित करने के लिए RBI की स्थापना इस अधिनियम के अंतर्गत की गई।
  • इस अधिनियम के द्वारा केंद्र व राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया।

1947 का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

  • 4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता विधेयक संसद में पेश हुआ। और 18 जुलाई 1947 को पारित हुआ। 
  • 15 अगस्त 1947 को इसी अधिनियम के द्वारा भारत व पाकिस्तान स्वतंत्र हुए। 
  • 14 अगस्त को पाकिस्तान स्वतंत्र हुआ और 14 अगस्त की मध्य रात्रि को भारत आजाद हुआ।
  • इस अधिनियम के तहत देसी रियासतों से ब्रिटेन ने अपना अधिकार समाप्त कर दिया और उन्हें स्वतंत्रता दी कि वह भारत व पाकिस्तान में से किसी में भी जा सकते हैं। या वे स्वतंत्र रह सकते हैं।
  • इस अधिनियम के द्वारा यह तय किया गया कि जब तक संविधान सभा नहीं है तब तक लॉर्ड माउंटबेटन भारत के गवर्नर होंगे। और पाकिस्तान के गवर्नर मोहम्मद अली जिन्ना होंगे।





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