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कारगिल युद्ध की पूरी कहानी और ऑपरेशन विजय क्या है।


हेलो दोस्तों इस पोस्ट में हम जानेंगे कि कारगिल युद्ध की पूरी कहानी इस युद्ध को भारत ने कैसे जीता। और जानेंगे कारगिल युद्ध के समय जो ऑपरेशन चलाए गए उनके बारे में जैसे-थल सेना के द्वारा चलाया गया ऑपरेशन विजय और वायु सेना के द्वारा चलाया गया सफेद सागर ऑपरेशन और नौसेना के द्वारा चलाया गया ऑपरेशन तलवार इन तीनों ऑपरेशन की दम पर ही भारत ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी।

कारगिल युद्ध की पूरी कहानी और ऑपरेशन विजय क्या है।



भारत के जल,थल,वायु इन तीनों जगह पर चलाए गए ऑपरेशन विजय, सफेद सागर, तलवार की दम पर ही पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा और पाकिस्तान ने अपने हथियार डाल दिए।



कारगिल युद्ध के समय भारत और पाकिस्तान दोनों के पास ही परमाणु हथियार थे दोनों ही देश परमाणु संपन्न देश थे। अगर यह युद्ध परमाणु युद्ध में बदल जाता तो दोनों देशों के लिए काफी ज्यादा घातक साबित हो सकता था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए। भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी  21 फरवरी 1999 को बस द्वारा दिल्ली से लाहौर गए थे। और एक लाहौर समझौते पर हस्ताक्षर किए इस समझौते मैं लिखा गया कि हम दोनों देश अतीत की बातों को भुलाकर भविष्य में साथ मिलकर कार्य करेंगे और कश्मीर के मुद्दे को बैठकर एक साथ सुलझा लेंगे। और दोनों ही परमाणु संपन्न देश हैं हम अपने परमाणु हथियारों का उपयोग एक-दूसरे पर नहीं करेंगे।



पाकिस्तान में भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को इक्कीस तोपों की सलामी दी गई। लेकिन भारत को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। की जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई को इक्कीस तोपों की सलामी दी जा रही थी उसके ठीक 3 महीने बाद मई में यह टोपे भारत के सीने पर चलने वाली है।



1999 में पाकिस्तान की सेना में जनरल के पद पर परवेज मुशर्रफ थे। जो बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी बने। लेकिन हम बात कर रहे हैं 1999 की जब भारत-पाकिस्तान मैं कारगिल का युद्ध हुआ उस समय पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ थे।


लेकिन कारगिल युद्ध की रूपरेखा मेजर जावेद हसन ने तैयार की थी। और ऑपरेशन अलबद्र कारगिल के समय पाकिस्तान ने चलाया था।





कारगिल युद्ध का कारण


शिमला समझौते के तहत अक्टूबर में कारगिल में Temperature  - 30 से - 40 पहुंच जाता है। अक्टूबर के महीने में पाकिस्तान की सेना अपनी पोस्टों को खाली कर वापस लौट जाती और भारत की सेना भी अपनी पोस्टों को खाली कर लौट आती। फिर मई-जून के महीने में कारगिल में भारत-पाकिस्तान की सेना अपनी-अपनी पोस्टों पर जाती थी।



लेकिन इस बार पाकिस्तान ने अक्टूबर के महीने में अपने बंकरो को खाली नहीं किया भारत की सेना तो अपने-अपने बंकरो को छोड़कर लौट आई लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया।


पाकिस्तान ने ऑपरेशन अलबद्र के तहत अपनी सेना भारतीय बंकरो में भेज दी और उन्हें हथियारो की सप्लाई कर  दी।


कारगिल का सबसे भयंकर युद्ध द्रास घाटी में हुआ। द्रास घाटी में ही टाइगर हिल है।



कारगिल युद्ध की शुरुआत कैसे हुई


एक किसान थे जिनका नाम तहसीन दयाल था उनका याक जो एक पशु होता है। वह खो गया था। जब यह किसान अपने पशु को ढूढ़ने गया तब इस किसान ने दूरबीन से देखा कि वहां कुछ लोग बंकर बना रहे हैं।


किसान ने इस बात की जानकारी सेना को दी। इस बात की पुष्टि करने के लिए सेना ने एक पेट्रोलिंग पार्टी भेजी जिसमें पांच जवान थे। इस पेट्रोलिंग पार्टी पर पाकिस्तान की सेना ने हमला कर दिया और 5 मई को कारगिल युद्ध की शुरुआत हुई। हमले में पांच जवान शहीद हो गए। और पाकिस्तान ने भारत की 140 पोस्टों पर कब्जा कर लिया था।



9 मई को पाकिस्तान की सेना ने कारगिल में एक पोस्ट पर हमला किया जहां पर भारत का गोला बारुद रखा हुआ था। इससे भारत को 127 करोड रुपए का नुकसान हो गया और गोला बारुद नष्ट हो गया।


थल सेना के द्वारा चलाया गया ऑपरेशन


इसके बाद भारत ने 19 मई 1999 को ऑपरेशन विजय चालू किया। और ऑपरेशन विजय के अंतर्गत भारत की सेना ने कारगिल की सबसे ऊंची चोटी टाइगर हिल पर कब्जा किया।


कारगिल की लड़ाई में भारत के पास सबसे मशहूर हथियार बोफोर्स तोप थी। जो राजीव ग़ांधी के समय खरीदी गई थी।


वायु सेना के द्वारा चलाया गया ऑपरेशन


भारत की वायु सेना ने 26 मई 1999 को ऑपरेशन सफेद सागर चालू किया। इसके अगले ही दिन 27 मई को mig-27 को उड़ाया इसमें कुछ Technical खराबी होने की वजह से यह विमान क्रैश हो गया और पायलट पैराशूट से पाकिस्तान में चले गए लेकिन बाद में दबाव में आकर पाकिस्तान ने पायलट नचिकेता को लौटा दिया।



Mig-27 को देखने के लिए एक और विमान को लगाया गया इस विमान का नाम मिग-21 था इस विमान के पायलट  अजय अहललुबालिया थे। यह विमान काफी लो हाइट से सर्चिंग कर रहा था। लेकिन मिग-21 विमान पर पाकिस्तानी सेना ने स्टिंगर मिसाइल से हमला कर दिया और यह विमान क्रैश हो गया। और जैसे ही यह विमान क्रैश हुआ पायलट ने पैराशूट से नीचे उतरने की कोशिश की लेकिन पायलट अजय अहललुबलिया को हवा में ही शहीद कर दिया।


27 मई 1999 का दिन भारतीय वायु सेना के लिए बहुत बुरा दिन काला दिन साबित हुआ।


ऑपरेशन सफेद सागर में सबसे ज्यादा निर्णायक भूमिका मिराज-2000 ने निभाई थी। इस विमान ने लेजर बमों का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान की सेना को धो डाला।


भारतीय नेवी के द्वारा चलाया गया ऑपरेशन


भारतीय नेवी के द्वारा ऑपरेशन तलवार चलाया गया इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नेवी ने अपने सारे जहाज ,पनडुब्बी एयरक्राफ्ट अरब सागर में उतार दिए और पाकिस्तान का रास्ता बिल्कुल ब्लॉक कर दिया पाकिस्तान की हालत इतनी बुरी हो गई थी कि पाकिस्तान के पास सिर्फ 6 दिनों के लिए पेट्रोल बचा हुआ था। भारतीय नेवी ने  पाकिस्तान की ऑयल  शिपिंग लाइन को  पूरी तरह से काट दिया था । पाकिस्तान की नेवी  इतनी सक्षम नहीं थी कि वह भारत की नेवी से टक्कर ले सके। 


भारतीय नेवी मलक्का तक पहुंच गई थी। और अरबसागर को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया था। अब पाकिस्तान के पास सिर्फ एक ही ऑप्शन बचा वह था भारत के सामने सरेंडर करने का और 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तान ने भारत के सामने सरेंडर कर दिया और युद्ध की समाप्ति हुई।


पाकिस्तान मदद मांगने के लिए अमेरिका, चीन ,सऊदी अरब के पास गया। लेकिन किसी ने भी पाकिस्तान की मदद नहीं की। इसी बीच पाकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ का एक ऑडियो वायरल हो गया जिसमें वह खुद कह रहे थे कि हमने भारत में घुसपैठ की है।


कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को क्या समस्या आयी


  1. पाकिस्तान के कई सैनिक मारे गए।
  2. पाकिस्तान से अमेरिका का भरोसा उठ गया।
  3. पाकिस्तान को पूरी दुनिया में शक की नजरों से देखा जाने लगा।
  4. कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की सेना में आपस में कोआर्डिनेशन नहीं था।


कारगिल के युद्ध में भारत को क्या समस्या आयी


  1. भारत के लिए सबसे बड़ी मुसीबत मौसम की थी मौसम बिल्कुल खराब था।
  2. दूसरी सबसे बड़ी मुसीबत ऊँचाई की थी यह युद्ध 18 हजार फुट की ऊंचाई पर हो रहा था। जिसमें भारतीय सेना को बहुत सारी परेशानियां आई।
  3. भारत का सबसे बड़ा फेलियर था। जासूसी पाकिस्तान अंदर तक घुस गयी। और भारत के जासूसों को पता ही नहीं चला


कारगिल युद्ध मे शहीद हुए सैनिक


कारगिल युद्ध में कुल 500 से ज्यादा जवान शहीद हुए और 13 सौ जवान घायल हुए। कारगिल का युद्ध पूरे 2 महीने तक चला और इस युद्ध में 22 से 30 साल तक के युवाओं ने शहादत दी। भारतीय सेना में ज्यादातर सैनिक 22 से 30 साल की उम्र के थे। इनमें एक नाम आता है विक्रम बत्रा का विक्रम बत्रा अपनी सैलरी लेने से पहले ही शहीद हो गए उन्हें अपनी सैलरी का बेसब्री से इंतजार था।





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