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Thorndike ka sambandh baad ka Siddhant || थार्नडाइक का संबंधवाद का सिद्धांत

Thorndike ka sambandh baad ka Siddhant | थार्नडाइक का संबंधवाद का सिद्धांत


इस सिद्धांत को अमेरिकन मनोवैज्ञानिक थार्नडाइक ने 1898 ईसवी में प्रतिपादित किया। थार्नडाइक ने यह प्रयोग बिल्लियों , कुत्तों ,  बंदरों पर किया और इस बात को सिद्ध किया था कि मनुष्य और पशु दोनों प्रयास और भूल द्वारा बहुत कुछ सीख सकते हैं प्रयास जैसे-जैसे बढ़ता जाता है भूल वैसे-वैसे ही कम होती जाती है।

Thorndike ka sambandh baad ka Siddhant | थार्नडाइक का संबंधवाद का सिद्धांत


 थार्नडाइक पहले अमेरिकी पशु मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने पशु पर प्रयोग किया।


    थार्नडाइक के संबंधवाद सिद्धांत को कई नामों से जाना जाता है।




    • आवृत्ति का नियम
    • प्रयत्न व भूल का सिद्धांत
    • प्रयास व त्रुटि का सिद्धांत
    • चयन का सिद्धांत
    • S-R का सिद्धांत
    • उद्दीपक- अनुक्रिया का सिद्धांत
    • संयोजनवादी सिद्धांत

    उद्दीपक और अनुक्रिया क्या है।


    उद्दीपक (Stimulis) - वह वस्तु या स्थिति जो किसी भी व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है उसे उद्दीपक कहते हैं।
    जैसे - भोजन , पानी आदि

    अनुक्रिया (Response) - उद्दीपक के अनुसार किया जाने वाला कार्य अनुप्रिया है।
    जैसे - भोजन को खाना


    थार्नडाइक का प्रयोग (Experiments)



    थार्नडाइक का प्रयोग एक भूखी बिल्ली पर था। थार्नडाइक ने एक बक्से में भूखी बिल्ली को रखा। और बक्से के बाहर  मृत मछली को रखा बक्से के अंदर लीवर लगा था . जिसे दबाने से बक्सा खुल जाता था बिल्ली को बक्से के अंदर और खाने की वस्तु को बक्से के बाहर रखा गया बिल्ली को 24 घंटे भूखी रखा गया अब बिल्ली भोजन तभी प्राप्त कर सकती थी जब वह लकड़ी के लीवर को दबाकर बक्सा खोलना सीख जाए।

     बिल्ली कई बार असफल हुई लेकिन कई असफल प्रयास करने के बाद बिल्ली ने लीवर को दबा दिया लीवर के दबने से उस बॉक्स का गेट खुल गया और बिल्ली बाहर आ गई बाहर आकर बिल्ली ने भोजन को प्राप्त किया।

    थार्नडाइक ने शीघ्रता से दूसरे प्रयास के लिए बिल्ली को पुनः पिंजरे में बंद कर दिया इस बार बिल्ली जल्दी ही लीवर को दबाकर पिंजरे का दरवाजा खोलने में सफल हो गई थार्नडाइक ने देखा कि कुछ प्रयासों के बाद बिल्ली अनावश्यक तथा अवांछित क्रियाओं को कम करने लगी एवं शीघ्रता से लीवर को दबाकर पिंजरे का दरवाजा खोलने में निपुण हो गई उसने बिल्ली के द्वारा पिंजरा खोलना सीखने की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए निष्कर्ष निकाला की उद्दीपक व वांछित अनुप्रिया के बीच एक बंधन बन गया है।

    थार्नडाइक ने सीखने के 3 मुख्य नियम दिये हैं (Primary Laws Of Learning)

    1. तैयारी या तत्परता का नियम (Law Of  Learning)

    किसी कार्य को सीखने के लिए विद्यार्थी को तैयार होना चाहिए यह तत्परता शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की होती है।

    जब हम सीखने के लिए तैयार होते हैं तो हम शीघ्रता प्रभावशाली ढंग एवं संतुष्टि से सीख जाते हैं परंतु जब हम सीखने के लिए तैयार नहीं होते तो ऐसा नहीं होता।

    इस नियम को प्रेरणा का नियम कहा जाता है वुडवर्थ ने तत्परता के नियम को मानसिक विन्यास का नियम कहां।

    विद्यार्थियों को सीखने के लिए तैयार होने की आवश्यकता होती है यदि विद्यार्थी मानसिक और शारीरिक तौर पर तैयार होगा तभी वह अधिक सीख पाएगा।

    2. अभ्यास का नियम (Law of Exercise) 

    सीखने की प्रक्रिया में अभ्यास का सर्वाधिक महत्व होता है अभ्यास के नियम के अनुसार सामान्यता हम जिन विषयों का अभ्यास करते रहते हैं उनमें संबंध अच्छा होता है जबकि जिन विषयों का अभ्यास छोड़ देते हैं उनका संबंध कमजोर हो जाता है।

    अभ्यास के नियम को उपयोग और अनुप्रयोग का नियम भी कहते हैं।

    उपयोग का नियम - इस नियम का अर्थ है कि अधिगम अभ्यास से सदृढ़ होता है अभ्यास करने से कोई भी कार्य अधिक सरल अधिक निश्चित एवं तीव्र हो जाता है।

    अनुपयोग का नियम - इस नियम का अभिप्राय है कि जब किसी कार्य को दोहराया नहीं जाता तो उससे संबंधित अधिगम भी समाप्त हो जाता है किसी कौशल का अभ्यास कुछ दिन न किया जाए तो उसमें कुशलता समाप्त हो जाती है।

    3. प्रभाव यह परिणाम का नियम / संतोष और असंतोष का नियम (Law of implication)

    अनुक्रिया और उद्दीपक के मध्य यदि प्राणी को संतोष की प्राप्ति होती है तो अनुबंधन मजबूत होगा और यदि असंतोष की प्राप्ति होती है तो अनुबंधन कमजोर होगा।

    थार्नडाइक का यह नियम सीखने की प्रक्रिया में पुरस्कार और दंड के महत्व को प्रकाश में लाता है बालक के सीखने पर यदि कोई पुरस्कार दिया जाए अथवा उसकी प्रशंसा की जाए तो उसे आगे और सीखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है तथा दंड मिलने पर बच्चा निरुत्साहित हो जाता है।

    थार्नडाइक ने यह कहा की अभ्यास से ही सीखना प्रभावी नहीं होता अभ्यास के साथ पुरस्कार मिलने पर ही सीखना प्रभावी होता है इस नियम को 1930 में पुनः संशोधित किया गया।


    थार्नडाइक ने 5 गोण नियम बताए हैं (Minor Laws Of Learning)


    1. बहुक्रिया का नियम -


    •  इस नियम के अनुसार व्यक्ति के सामने नई समस्या आने पर उसे समझाने के लिए वह विभिन्न प्रतिक्रिया कर हल ढूंढने का प्रयास करता है वह प्रतिक्रियाएं तब तक करता रहता है जब तक समस्या का सही हल नहीं मिल जाता और उसकी समस्या सुलझ नहीं जाती ऐसे ही व्यक्ति को संतोष की प्राप्ति होती है।
    • बहु क्रिया के नियम में प्राणी लक्ष्य के प्रति अनेक क्रियाएं करता है तब जाके अनुबंधन होता है।

    2. मानसिक स्थिति या मनोवृति का नियम


    • मानसिक स्थिति के नियम के अनुसार जब व्यक्ति सीखने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहता है तो वह शीघ्र सीख लेता है इसके विपरीत यदि व्यक्ति मानसिक रूप से किसी कार्य को सीखने के लिए तैयार नहीं रहता तो उस कार्य को वह सीख नहीं सकता।
    • मनोवृति के नियम में मन का अर्थ मस्तिक से होता है और व्रति का अर्थ नजरिया होता है किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यक्ति का सकारात्मक नजरिया होना चाहिए तब वह अपने लक्ष्य को जल्दी प्राप्त करता है।

    3.आंशिक क्रिया का नियम (law of partial activity)


    • इस नियम के अनुसार व्यक्ति किसी समस्या को सुलझाने के लिए अनेक क्रियाये प्रयत्न एवं भूल के आधार पर करता है वह अपनी अंतर्दृष्टि का उपयोग कर आंशिक क्रियाओं की सहायता से समस्या का हल ढूंढ लेता है।
    • आंशिक क्रिया का अर्थ है छोटी-छोटी क्रियाएं करना और उनसे अपने लक्ष्य तक पहुंचना।

    4. समानता का नियम 


    • इस नियम के अनुसार किसी समस्या के प्रस्तुत होने पर व्यक्ति के पूर्व अनुभव या परिस्थितियों में समानता पाए जाने पर उसकी अनुभव स्वत ही स्थानांतरित होकर सीखने में मदद करते हैं।
    • समानता के नियम में पूर्व ज्ञान नए ज्ञान को प्रभावित करता है।

    5. साहचर्य परिवर्तन का नियम (Law of associative shifting)


    • इस नियम के अनुसार व्यक्ति प्राप्त ज्ञान का उपयोग अन्य परिस्थिति में यह सारी उद्दीपक वस्तु के प्रति भी करने लगता है जैसे कुत्ते के मुंह से भोजन सामग्री को देखकर लार टपकने लगती है।
    • साहचर्य नियम मैं बालक को संवेदनशील होकर पढ़ाना चाहिए।


    थार्नडाइक के सिद्धांत की मूल बातें


    1. अभ्यास में प्रयास एवं भूल समाहित होती है।
    2. अधिगम अनुबंधन का परिणाम है।
    3. अधिगम में समय लगता है यहां एक उत्तरोत्तर प्रक्रिया है।
    4. अधिगम संज्ञान पर आधारित नहीं होता है।
    5. बिल्ली अनेक गलत अनुक्रिया करती है अर्थात अधिगम में भूल समाहित होती है।
    6. बिल्ली उद्दीपक के लिए अनेक क्रियाएं करती है अर्थात प्रयास करती है।
    7. उद्दीपक और अनुक्रिया के मध्य संबंध बनता है।
    8. दिल्ली संयोगवश अचानक लीवर पर पैर रखती है इसलिए इस सिद्धांत को संयोजनवादी सिद्धांत कहते हैं।

    थार्नडाइक के सिद्धांत का शिक्षा में क्या महत्व है (Education Implication)



    1. बच्चों को बार बार अभ्यास करवाना चाहिए।
    2. थार्नडाइक का यह प्रयोग छोटे तथा मंदबुद्धि बालकों के लिए उपयोगी है।
    3. इस प्रयोग से बालकों में परिश्रम के प्रति आशा का संचार होता है।
    4. यह सिद्धांत अभ्यास की क्रिया पर आधारित है किससे सीखा गया कार्य स्थाई बनता है।
    5. इस सिद्धांत से बालकों में धैर्य तथा परिश्रम के गुणो का संचार होता है।
    6. इस नियम से बालकों की आदतों का निर्माण होता है और बुरी आदतों का लोप हो जाता है।
    7. बालकों में अच्छे स्वभाव तथा अच्छी आदतें पैदा होती हैं ।


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