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Madhya Pradesh ke Pramukh Rajvansh aur riyasat- मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश और रियासत

Madhya Pradesh ke Pramukh Rajvansh aur riyasat- मध्य प्रदेश के प्रमुख राजवंश और रियासत


मध्य प्रदेश राज्य भारत के केंद्र में स्थित होने के कारण मध्य प्रदेश को हृदय प्रदेश कहा जाता है ,भू वैज्ञानिक दृष्टि से यह भारत का प्राचीनतम भाग माना जाता है, हिमालय से भी पुराना यह भूखंड किसी समय उस संरचना का हिस्सा था जिसे हम गोंडवाना लैंड कहते थे।

Madhya Pradesh ke Pramukh Rajvansh aur riyasat


मध्यप्रदेश में कई छोटी बड़ी रियासत का उदय हुआ है, इन रियासतों ने भारत के कई क्षेत्रों पर अपना शासन स्थापित किया था, लेकिन आज हम कुछ मुख्य रियासत या राजवंश के बारे में आपको बताने वाले हैं। और बताने वाले हैं की इन राजवंशों का क्या योगदान रहा है।

सिंधिया वंश



  • ग्वालियर के सिंधिया वंश का संस्थापक रानोजी सिंधिया को माना जाता है।
  • इस वंश के ग्वालियर दुर्ग को किलो का रत्न या भारत का जिब्राल्टर कहा जाता है।
  • सिंधिया वंश के राजा जीवाजीराव ने वर्ष 1948 में राज्य का भारत संघ में विलय किया तथा वे संयुक्त संघ के राज्य प्रमुख बनाए गए थे।
  • सिंधिया वंश के शासक दौलतराव सिंधिया ने अपनी राजधानी उज्जैन से ग्वालियर हस्तांतरित की थी।
  • महादजी सिंधिया ने मुगल शासक शाह आलम को कंपनी के आधिपत्य से मुक्त करा कर दिल्ली की गद्दी पर पुनः बैठाया था।
  • सिंधिया वंश की स्थापना उज्जैन में महादजी सिंधिया ने की थी महादजी सिंधिया ने ग्वालियर के तत्कालीन जाट सरदार लोकेंद्र सिंह से ग्वालियर के किले को जीता था।

बघेल राजवंश



  • बघेल वंश का शासक रीवा में रहता था इसी वंश के राजा रामचंद्र के दरबार में थे संगीतज्ञ तानसेन को मुगल सम्राट अकबर ने अपने दरबार में बुला लिया था 1569 ईस्वी में बघेल राजवंश ने मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली थी।

  • बघेल राजवंश के वीर मानसिंह ने चौसा के युद्ध में हुमायूं की सहायता की थी।

बुंदेला वंश



  • 14 शताब्दी में बुंदेला वंश का उदय हुआ था इस वंश के रूद्र प्रताप बुंदेला ने 1531 ईस्वी में ओरछा को अपनी राजधानी बनाया था।

  • बुंदेला वंश के शासक वीर सिंह बुंदेला ने जहांगीर के कहने पर अबुल फजल की हत्या की थी , इस वंश का प्रसिद्ध राजा छत्रसाल था जिस ने मुगलों के साथ युद्ध किया था परंतु बाद में मुगल दरबार में 4000 का मनसब पद प्राप्त किया।

  • बुंदेला वंश के शासनकाल में ओरछा में स्थापत्य कलायुक्त भवनों एवं मंदिरों का निर्माण किया गया।


  • बुंदेला राजवंश हृदय शाह ने गड़ा के समीप गंगा सागर जलाशय का निर्माण करवाया था।

  • बुंदेला शासक मधुकर शाह का पुत्र रामचंद्र जहांगीर के समकालीन था।

गोंड राजवंश



  • यादव राय ने गड़ा कंठगा में गोंड राजवंश की स्थापना की थी गॉड राजवंश का सबसे प्रसिद्ध राजा संग्राम शाह था।


  • अकबर के समकालीन गोंड राजवंश की शासिका रानी दुर्गावती थी मुगल सेनापति आसिफ खा ने दुर्गावती को पराजित किया था।

चंदेल वंश



  • चंदेल वंश ने महोबा में शासन किया था इस वंश का संस्थापक नंनुक था।

  • राजा धंगदेव के शासनकाल में चंदेल ओं के प्रति हारों से स्वतंत्र होकर अपने राज्य का विस्तार किया था।

  • खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों पार्श्वनाथ एवं विश्वनाथ का निर्माण धंगदेव ने करवाया था।

  • अंतिम चंदेल शासक परमर्दी को कुतुबुद्दीन ऐबक ने हराकर महोबा को अपने राज्य में मिला लिया था।

होलकर वंश



  • 1730 ईस्वी में मालवा में होलकर वंश की स्थापना हुई थी इस वंश के संस्थापक मल्हार राव होलकर थे जिन्होंने 1732 ईस्वी में इंदौर को अपनी राजधानी बनाया था।

  • पानीपत की तीसरी लड़ाई में मल्हार राव होलकर  के शहीद होने के बाद अहिल्याबाई ने शासन की बागडोर संभाली थी।

  • अंतिम होलकर शासक तुकोजी तृतीय ने राज्य का भारत संघ में विलय कर दिया था।


तोमर वंश



  • वीर सिंह तोमर ने चौधरी सदी में मुस्लिम सप्ताह की अराजक स्थिति का फायदा उठाकर ग्वालियर में तोमर वंश की स्थापना की थी । इस वंश के राजा सूरज सेन ने ग्वालियर का मजबूत किला बनवाया था जिसे किलो का जिब्राल्टर कहा जाता है।

  • तोमर वंश के राजा मानसिंह तोमर ने ग्वालियर में प्रसिद्ध सास बहू का मंदिर तथा गुजरी महल बनवाए थे अंतिम तोमर राजा विक्रमादित्य को हराकर इब्राहिम लोदी ने ग्वालियर पर अधिकार कर लिया था।


परमार वंश



  • परमार वंश की स्थापना उपेंद्र कृष्णराज ने की थी परंतु इस वंश का प्रथम स्वतंत्र शासक सिमुक था परमार वंश का प्रसिद्ध राजा भोज था।

  • परमार वंश की राजधानी धार थी राजा भोज ने भोजताल ( भोपाल ) सरस्वती मंदिर ( धार )आदि का निर्माण कराया था।

  • परमार वंश के राजा जय सिंह को हराकर गुजरात के शासक चालुक्य भीम प्रथम एवं कलचुरी शासक कर्ण के संघ ने मालवा को हथिया लिया था।


गुर्जर प्रतिहार वंश



  • गुर्जर प्रतिहार वंश का प्रसिद्ध राजा नागभट्ट प्रथम था , जिसका शासनकाल 730 से 756 ईसवी तथा गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट प्रथम ने उज्जैनी में शासन किया था इसने अरबों के भारत पर आक्रमण को विफल कर दिया था।


शुंग वंश



  • शुंग वंश की स्थापना 186 ईसा पूर्व के आसपास अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने उसकी हत्या करके की थी।

  • पुष्यमित्र शुंग का पुत्र अग्निमित्र विदिशा का शासक था, शुंग वंश के 5 वे शासक भागभद्र के समय मैं यवन राजदूत हेलिओडोरस ने विदिशा में भागवत धर्म से प्रभावित होकर गरुड़ध्वज की स्थापना कराई थी।


मौर्य वंश



  • मध्यप्रदेश में मौर्य सत्ता के व्यापक साक्ष्य मिले हैं ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार हेतु सांची के स्तूप का निर्माण करवाया था।

  • मौर्य युग में व्यापारिक मार्गों की संख्या 4 थी , जिनमें तीसरा मार्ग दक्षिण में प्रतिष्ठान से उत्तर में श्रावस्ती तक जाता था जिसमें महिष्मति उज्जैन विदिशा आदि नगर स्थित थे, जबकि चौथा प्रसिद्ध व्यापारिक मार्ग भृगुकच्छ से मथुरा तक जाता था जिसकी रास्ते में उज्जैनी पड़ता था उस समय व्यापार के ऊपर राज्य का नियंत्रण होता था।









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