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Adhigam Ka Arth Aur Paribhasha- अधिगम का अर्थ और परिभाषाएं

 अधिगम का अर्थ और परिभाषाएं ( Meaning Of Learning )


अधिगम का अर्थ और परिभाषाएं

सीखना मानव के व्यवहार की आधारभूत प्रक्रिया है , बालक जन्म से लेकर मृत्यु तक कुछ ना कुछ सीखता रहता है , व्यक्ति प्रत्येक स्थान पर कुछ ना कुछ सीखते हुए अपने व्यवहार को संशोधित करता है , व्यक्ति का संपूर्ण व्यवहार उसके ज्ञान विश्वास उपलब्धि सफलता तथा उसके संपूर्ण अधिगम को प्रभावित करता है ।

सीखने के द्वारा जीवन लक्ष्यों की पूर्ति में सहायता मिलती है प्रत्येक व्यक्ति अपने ढंग से अपनी जिंदगी जीता है , उसके अपने आदर्श तथा जीवन लक्ष्य होते हैं जिसकी प्राप्ति के लिए वह लगातार संघर्ष करता रहता है , सीखने की प्रक्रिया द्वारा प्राप्त परिणाम उसे इन आदर्शों तथा जीवन लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता पहुंचाते हैं।

सीखने के लिए कोई स्थान विशेष निश्चित नहीं होता है व्यक्ति कहीं भी किसी भी समय किसी से भी कुछ भी सीख सकता है मनोवैज्ञानिक भाषा में सीखने को अधिगम कहते हैं।

अधिगम के द्वारा व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाए जा सकते हैं , अधिगम को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिससे अधिगमकर्ता के व्यवहार में हमें परिवर्तन दिखाई देते हैं।

अधिगम से अभिप्राय अभ्यास या अनुभवों के द्वारा व्यवहार में परिवर्तन लाने की प्रक्रिया से है।

अधिगम की ब्रांच (School)

अधिगम की 4 ब्रांच है।

1. व्यवहारवादी ( संबंधवादी)
2. संज्ञानवादी ( गेस्टाल्टवाद)
3. मानवतावादी
4. समाजवादी

1.व्यवहारवादी संप्रदाय (BehaviouristTheories) व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक का मानना है कि सीखने के लिए उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच एक बंधन स्थापित होता है । जिसे हम अधिगम कहते हैं।

व्यवहारवादी संप्रदाय में पांच मनोवैज्ञानिक शामिल है।
थार्नडाइक , पावलाव , स्किनर ,क्लार्क एल हल , गुथरी

2. संज्ञानवादी संप्रदाय (Cognitive Theories) संज्ञानवादी संप्रदाय को गेस्टाल्ट संप्रदाय भी कहा जाता है इस संप्रदाय का मानना है कि पहले सूझ उत्पन्न होती है ,उसके बाद अधिगम प्राप्त होता है।

गेस्टाल्टवाद संप्रदाय में तीन मनोवैज्ञानिक शामिल है।
कोहलर , कोफ़्का , कर्ट लेविन

3. मानवतावादी संप्रदाय - इस संप्रदाय के अंतर्गत दो मनोवैज्ञानिक शामिल हैं ।
मैस्लो , कार्ल रोजर

4. समाजवादी संप्रदाय - इस संप्रदाय के अंतर्गत एक मनोवैज्ञानिक शामिल हैं।
बंडूरा वॉल्टन 

अधिगम की परिभाषाएं (Defination Of Learning)


गिलफोर्ड - व्यवहार के कारण व्यवहार में आया परिवर्तन ही अधिगम है।

क्रो एंड क्रो - आदतों ज्ञान तथा अभिव्रतियों का अर्जन ही अधिगम है।

वुडवर्थ - नवीन ज्ञान तथा नवीन प्रतिक्रियाओं का अर्जन करने की प्रक्रिया अधिगम है।

अधिगम के प्रकार (Type Of Learning)

अधिगम के दो प्रकार होते हैं।
1. गत्यात्मक अधिगम - गत्यात्मक अधिगम शरीर से मस्तिष्क की तरफ चलता है।

जैसे - क्रिकेट खेलना , टाइपिंग करना

2. संज्ञानवादी अधिगम - संज्ञानवादी अधिगम मस्तिक से शरीर की तरफ चलता है।

जैसे - चिंतन करना , लिखना

अधिगम की प्रकृति एवं महत्व - 


  • सामान्य अर्थ में सीखना व्यवहार में परिवर्तन को कहा जाता है परंतु व्यवहार में हुए सभी तरह के परिवर्तन को सीखना नहीं कहा जाता है।

  • अधिगम उद्देश्य पूर्ण होता है, प्रत्येक व्यवहार का कोई ना कोई उद्देश्य कारण तथा महत्व होता है।

  • अधिगम नए अनुभवों का संगठन है मनोविज्ञान में सीखने से तात्पर्य उन्हीं परिवर्तनों से होता है जो अभ्यास तथा अनुभव के फलस्वरुप होते हैं।

  • मानव जन्म के पश्चात सीखना शुरू कर देता है ,वहां अनुकरण अभ्यास जिज्ञासा जैसे कारकों के माध्यम से सीखता है, यह गति कुछ बालकों में तेज या मंद हो सकती है।

  • अधिगम जीवन पर्यंत चलने वाली निरंतर प्रक्रिया है , यह औपचारिक शिक्षा तक ही सीमित नहीं है परंतु इसका संबंध जीवन की प्रत्येक अवस्था से है।

  • अधिगम एक ऐसी व्यापक प्रक्रिया है जिसका क्षेत्र बहुत बड़ा है।

  • अधिगम एक सर्वव्यापी प्रक्रिया है यह सभी के द्वारा किया जाता है चाहे वह पशु-पक्षी हो या मानव

  • अधिगम मैं मनुष्य की प्रक्रियाओं के तीन तत्व शामिल होते हैं भावात्मक , मनोप्रेरणा व संज्ञानात्मक

  • अधिगम एक मानसिक प्रक्रिया है अधिगम उद्देश्य पूर्ण एवं लक्षण निर्देशित होता है।

  • अधिगम पर्यावरण व वंशानुक्रम दोनों पर निर्भर करता है।

दोस्तों इस पोस्ट में हमने विस्तार पूर्वक आपको अधिगम के बारे में समझाया है , इस पोस्ट के आगे भी अधिगम से संबंधित पोस्ट मैं डालूंगा यदि आपको यह पोस्ट पसंद है , तो प्लीज ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए और कमेंट बॉक्स में अपना एक कमेंट लिखना मत भूलियेगा।

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