वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय -Vayu pradushan niyantran ke upay

वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय -Vayu pradushan niyantran ke upay
वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
वायु-प्रदूषण-नियंत्रण-के-उपाय


वायु प्रदूषण विश्व की सबसे बड़ी समस्या है और यह समस्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है । सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर और ग्रीनपीस साउथ-ईस्ट एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से 45 लाख मौतें होती हैं। 2017 में भारत में वायु प्रदूषण से 12 लाख लोगों की मौत हुई इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वायु प्रदूषण से कितना खतरा है। वर्तमान समय में पूरी दुनिया में 8 से 10 मीट्रिक टन कार्बनिक पदार्थों का उत्सर्जन होता है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय ( Air pollution control measures )


डीजल गाड़ियों में अति सूक्ष्म मात्रिक सल्फर युक्त डीजल या हरित डीजल का प्रयोग करना चाहिए।

CFC , फ्रेयांन-11 के उत्पादन एवं उपयोग में कटौती की जानी चाहिए।

फैक्ट्रियों चिमनियों में बेग फिल्टर लगा होना चाहिए जो 50 माइक्रोन से कम ब्यास वाले कड़कीय पदार्थ को पृथक करता है।

50 MM से बड़े आकार वाली कडकिय पदार्थ को छोड़कर अथवा छानकर अलग करने के लिए चिमनीयी में साइक्लोन सेपरेटर तथा पेंटस्क्रबर नामक उपकरणों का प्रयोग किया जाना चाहिए। पेंटस्क्रबर विधि में धुंए को जल से होकर गुजारा जाता है जिससे ठोस कणिकीय पदार्थों को अलग करने के लिए 2 उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

50 माइक्रोन से छोटे आकार वाले कनकीय पदार्थों को अलग करने के लिए 2 उपकरणों का प्रयोग किया जाता है ।1.इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रोसीपिरेटर
2. फैब्रिक फिल्टर

कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा के लोक हितकारी वाद पर नवंबर 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध कर दिया है।

वायु प्रदूषण के स्रोत गैस


कार्बन मोनोऑक्साइड ( co )

कार्बन मोनोऑक्साइड गैस की उत्पत्ति जीवाश्म ईंधन के अपूर्ण दहन से होती है। कार्बन मोनोऑक्साइड गैस को दम घोटू गैस कहते हैं। यह रक्त में पहुंचकर हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन बहन क्षमता को कम कर देती है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड की क्षमता ऑक्सीजन की क्षमता से 250 गुना अधिक होती है।

कार्बन मोनोऑक्साइड एक रंगहीन ,गंधहीन पानी में अघुलनशील गैस है।

कार्बन डाइऑक्साइड ( co2 )
Pixabay

कार्बन डाइऑक्साइड सभी जीव धारियों के लिए जीवनदायिनी गैस है क्योंकि प्राथमिक उत्पादक पौधे इसके बिना अपना भोजन नहीं बना सकते !
कार्बन डाइऑक्साइड की वृद्धि का कारण जीवाश्म ईंधन का दहन और वन विनाश है।

मीथेन ( ch4 )

मीथेन गैस की उत्पत्ति गोबर , वनस्पति के सड़ने ,मवेशियों के पागुर करने से दलहनी जमीनों से धान के खेतों से होती है ।प्राकृतिक क्षेत्रों में 70% उत्सर्जन आद्र भूमि से होता है ।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन ( cfc )

CFC गैस की उत्पत्ति स्प्रे , फोम , एसी , फ्रीज , प्लास्टिक तथा अग्निशामक से होती है।

फ्रेओंन सबसे घातक CFC है। जिसका प्रयोग फ्रिज , एसी सोफा में लगने वाले फोम तथा एरोसोल स्प्रे में होता है।

सीसा तथा कैडमियम धात्विक कड़कीयवायु प्रदूषक है।

पत्थर कटाई और घिसाई करने वाले मजदूरों को सिलिकोसिस और एस्बेस्टोसिस नामक रोग होता है।

NO2,NO दोनों विषैली गैस है । 

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