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शिक्षण सहायक सामग्री- Shikshan Sahayak samagri

शिक्षण सहायक सामग्री-Shikshan Sahayak samagri


दोस्तों यदि आप किसी भी राज्य के TET EXAM की तैयारी कर रहे हैं तो आपको शिक्षण सहायक सामग्रियों का ज्ञान होना आवश्यक है शिक्षण सहायक सामग्रीया प्रत्येक स्कूल में अध्यापन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करती हैं। इस पोस्ट में हमने शिक्षण सहायक सामग्रियों को बताने का प्रयास किया है। और यह EXAM की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
शिक्षण सहायक सामग्री-Shikshan Sahayak samagri
शिक्षण सहायक सामग्री 

शिक्षण सहायक सामग्री


छात्रों में अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करने व ज्ञान को स्थाई बनाने के लिए शिक्षक को शिक्षण कार्य के दौरान अनेक प्रकार के साधनों का प्रयोग करना पड़ता है अतः भी साधन जो अध्यापक की उद्देश्य पूर्ति अर्थात विद्यार्थियों के अधिगम में सहायक होते हैं वे सहायक सामग्री या शिक्षण अधिगम सामग्री कहलाते हैं शिक्षण सहायक सामग्री को हम श्रव्य दृश्य सामग्री भी कहते हैं। शिक्षण सहायक सामग्रियों में प्रथम महत्व प्रत्यक्ष वस्तु का होता है।

रेआलिया क्या है - यह शब्द उन वास्तविक वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता है जिनका निर्माण किसी संस्कृति विशेष या समाज विशेष के लोग करते हैं वह अपने लिए उपयोग करते हैं।
जैसे - बर्तन , औजार , वस्त्र , कलाकृतियां , खेती के उपकरण

डायोरामा क्या है - उन्हें त्रिविमीय दृश्यों को कहते हैं जिन्हें कोई समाज व संस्कृति के लोग किसी मूलभूत मानवीय क्रियाएं विशिष्ट जीवन पद्धतियों के आधार पर बनाते हैं डायोरमा एक दृश्य सामग्री है।

Note - शिक्षा शास्त्र के जनक मारिया मांटेसरी को कहा जाता है।

श्रव्य - दृश्य सामग्री क्या है।


श्रव्य दृश्य सामग्री के उपयोग को स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा आयोग कोठारी आयोग (स्थापना वर्ष 1964-1966)  ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रत्येक विद्यालय में सहायक सामग्री उपलब्ध करवाना अति आवश्यक है। कोठारी आयोग ने कहा कि सहायक सामग्री भारत देश में शैक्षिक क्रांति ला सकती है और प्रत्येक स्कूल में शैक्षिक सहायक सामग्री का होना आवश्यक है।

श्रव्य दृश्य सामग्री प्रतिभाशाली और मंदबुद्धि दोनों ही बालकों के लिए आवश्यक है इससे प्रतिभाशाली बालकों के चिंतन में गति व स्पष्टता आती है तथा मंदबुद्धि बालकों में सूचना प्रत्यय सूत्रों सिद्धांत को स्थूल रूप में समझने की क्षमता का विकास होता है।

दौलत सिंह कोठारी कौन थे?


दौलत सिंह कोठारी को प्रतिरक्षा विज्ञान का जनक कहा जाता है। दौलत सिंह कोठारी राजस्थान के उदयपुर जिले के रहने वाले थे दौलत सिंह कोठारी भारतीय रक्षा मंत्रालय में रक्षा सलाहकार थे और बाद में UGC के अध्यक्ष बनने वाले पहले वह एकमात्र राजस्थान के व्यक्ति थे।

पुस्तक- न्यूक्लियर एक्सप्लोजन एंड देयर इफैक्ट्स


शिक्षण सहायक सामग्रियों के प्रकार

दोस्तों हमने ऊपर पड़ा है कि शिक्षण सहायक सामग्री प्रत्येक स्कूल में अति आवश्यक है शिक्षण सहायक सामग्री  से बालक के तर्क और चिंतन में विकास होता है। अब हम पढ़ने वाले हैं कि शिक्षण सहायक सामग्री या कितने प्रकार की होती हैं।

A.इंद्रियों के आधार पर - 3 प्रकार


1. श्रव्य 2.दृश्य 3.दृश्य - श्रव्य

B.तकनीक के आधार पर - 2 प्रकार


1.सॉफ्टवेयर - सॉफ्टवेयर को हम मृदु उपागम कहते हैं।
2.हार्डवेयर - हार्डवेयर को हम कठोर उपागम कहते हैं।

C.प्रक्षेपण के आधार पर - 2 प्रकार


1.प्रक्षेपी सामग्री
2. अप्रक्षेपी सामग्री

N.C.E.R.T के अनुसार - 6 प्रकार


1.ग्राफिक्स चित्र - चित्र,कॉमिक्स,कार्टून
2.डिस्प्ले सामग्री - श्यामपट्ट ,बुलेटिन बोर्ड ,फ्लेनल बोर्ड
3.त्रिआयामी सामग्री - मॉडल , वास्तविक पदार्थ
4. श्रव्य सामग्री - रेडियो , टेप रिकॉर्डर , लिंगवाफ़ोन
5.प्रक्षेपी सामग्री - स्लाइड , फिल्म , स्ट्रिप
6.प्रक्रिया सामग्री - अभिनय , व्रत चित्र , क्षेत्र भृमण

Note- शिक्षण अधिगम सहायक सामग्रीयो कि सापेक्षिक प्रभावशीलता को अमेरिका के एडमर डेल ने दिया था।

पुस्तक - ऑडियो विजुअल मेथड ऑफ टीचिंग

एडमर डेल ने शिक्षण अधिगम सहायक सामग्रियों की सापेक्ष प्रभावशीलता को एक शंकु के माध्यम से समझाया।

एडमर डेल के अनुसार शंकु में ऊपर से नीचे जाने पर प्रभावशीलता का क्रम बढ़ता है तथा नीचे से ऊपर जाने पर प्रभावशीलता का क्रम घटता है।

शिक्षण सहायक सामग्री -
 A.श्यामपट्ट

श्यामपट्ट - दृश्य सामग्री / डिस्प्ले सामग्री
निर्माता - विलियम जेम्स
श्यामपट्ट - आयताकार
लिखते समय कोण - 45°
मिटाते समय - ऊपर से नीचे
शिक्षक का परममित्र - श्यामपट्ट

B. रेखाचित्र ( गणित में महत्वपूर्ण है। )

अध्यापकों द्वारा चौक की सहायता से श्यामपट्ट पर या विद्यार्थियों की सहायता से कागज पर बनाया गया चित्र रेखा चित्र कहलाता है।

C. फिल्म स्ट्रिप

यह एक प्रक्षेपी सामग्री है फिल्म स्ट्रिप का साइज 35mm होता है। यह सैलूलोज एसिटेट की बनी होती है।

D. फ्लेनल बोर्ड / फलालीन बोर्ड

फ्लैनल बोर्ड एक दृश्य सामग्री है इस बोर्ड पर यह बोर्ड कक्षा कक्ष में शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों को श्रेष्ठ अधिगम रुचि पूर्ण अधिगम के लिए चित्रों को प्रदर्शित करके काम में लिया जाता है इस बोर्ड पर प्रदर्शित किए गए चित्र और बुरे होते हैं यह लकड़ी का एक वर्ड होता है जिस पर फलालीन का कपड़ा लगा होता है।

E. बुलेटिन बोर्ड

बुलेटिन बोर्ड विद्यालय में ऐसी जगह पर लगाया जाता है जहां पर सभी विद्यार्थियों की दृष्टि आसानी से जा सके विद्यालय में सूचनाएं नवीनतम सामाजिक व राजनीतिक समाचार अभिव्यक्त को प्रदर्शित करने के लिए बुलेटिन बोर्ड का उपयोग किया जाता है। बुलेटिन बोर्ड एक दृश्य सामग्री है।

F.सेक्सटेंट

इसका उपयोग भूगोल वर्ग गणित में आंखों के स्तर पर बने कोण को नापने के लिए किया जाता है।

G. लिंगवाफ़ोन

यह एक श्रव्य सामग्री है विद्यालय में भाषा शिक्षण के दौरान बालकों का उच्चारण संबंधी दोष दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है इस यंत्र में अध्यापक द्वारा रिकॉर्ड आदेश वाचन होता है। लिंगवा फोन से बालकों के उच्चारण संबंधी दोषों को दूर किया जाता है।

H. ग्रामोफोन

यह एक श्रव्य सामग्री है विद्यालय में बालकों को गीत संगीत की शिक्षा देने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

I. रेडियो
रेडियो के आविष्कारक मोरिकोनी है। यह विधुत चुम्बकीय तंरगों द्वारा सृजित सिग्नलों के प्रेषण और ग्रहण करने का साधन है।

J. टेपरिकार्डर -

K. टेलीविजन -

L. क्षेत्र भर्मण -

M. व्रत चित्र -

N. प्रोजेक्टर -
यही प्रक्षेपण यंत्र है। यह एक दृश्य सामग्री है। छोटे चित्रों को बड़ा करके प्रक्षेपित करना प्रोजेक्टर का कार्य होता है प्रोजेक्टर का उपयोग बंद कमरे में किया जाता है प्रोजेक्टर में वर्ल्ड लेंस कांच का प्रयोग होता है।

प्रोजेक्टर के प्रकार - 5 प्रकार के होते है।

1.मैजिक लैंटर्न - मैजिक लैंटर्न को हम जादू की लालटेन या डाई इसको भी कहते हैं मैजिक लैंटर्न के माध्यम से कांच की पारदर्शी स्लाइड पर बने चित्रों को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जाता है।
उपयोग - सबसे पहले कांच की स्लाइड को साबुन से धोकर जिलेटिन के घोल में डुबोकर सुखाया जाता है फिर चित्र बनाए जाते हैं।

2. एपिस्कोप - यहां एक दृश्य सामग्री है इस यंत्र के द्वारा हम छोटी से छोटी वस्तु या पदार्थ को आसानी से देख सकते हैं।

3. एपिडायस्कोप - यह एक अपारदर्शी व पारदर्शी प्रोजेक्टर है इस यंत्र के माध्यम से कांच की पारदर्शी स्लाइड ओं पर बने चित्रों को बड़े करके प्रक्षेपित कर दिया जाता है। इसके अलावा किसी  पुस्तक पर बने चित्र को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जा सकता है।

4.शिरोपरि प्रक्षेपण यंत्र - इस यंत्र के माध्यम से प्लास्टिक की सीटों पर बने चित्रों को बड़ा करके प्रक्षेपित किया जाता है प्लास्टिक की ये शीट ट्रांस्प्रेनसिया कहलाती हैं।

5.LCD प्रोजेक्टर - कंप्यूटर में इंटरनेट से शिक्षा देने के लिए मुख्यतः LCD व DLP प्रोजेक्टर का प्रयोग किया जाता है इन प्रोजेक्टर की क्षमता की इकाई लुमिनस होती है यह दोनों अत्याधुनिक प्रोजेक्टर है।







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