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National Curriculum Framework 2005-राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 For Ctet/Uptet/Kvs

National Curriculum Framework 2005-राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 For Ctet/Uptet/Kvs

National Curriculum Framework 2005-राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 For Ctet/Uptet/Kvs
राष्ट्रीय -पाठ्यचर्या -की -रुपरेखा -2005 



NCF: National Curriculum Framework 2005



TET परीक्षा में अक्सर NCF: National Curriculum Framework 2005 से प्रश्न पूछ लिये जाते है। आज हम आपको NCF से संबंधित प्रश्न लेकर आये है। जिनसे TET परीक्षा में प्रश्न पूछे जा सकते है। यदि आप भी कोई भी TET EXAM देने वाले हैं। तो आपको इन प्रश्नों को अवश्य पढ़ना होगा। इन प्रश्नों से आपका स्कोर अच्छा हो सकता है। ऐसी हम प्रभु से प्रार्थना करते है।


  •  पाठ्यचर्या अंग्रेजी के Curriculum का हिंदी रूपांतरण है।
  •  NCERT बाल केंद्रित शिक्षा पर जोर देती है।
  •  Syllabus( पाठ्यक्रम ) शिक्षक की दृष्टि में रखकर बनाया जाता है।
  • जब बच्चा सर्वप्रथम नक्शे से पड़ता है तब नक्शा Projector से थोड़ा ऊपर होना चाहिए।
  •  माध्यमिक शिक्षा आयोग की स्थापना 1952-53 में हुई।
  • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या दस्तावेज का प्रारंभ प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री एवं राष्ट्रीय गान के निर्माता रविंद्र नाथ टैगोर की निबंध 'सभ्यता और प्रगति' से हुई है।
  •  सन 2005 में यशपाल समिति का गठन किया गया इसका शीर्षक था। 'शिक्षा बिना बोझ के'
  • Ncf-2005 की संचालन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल थे। प्रोफेसर यशपाल UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के अध्यक्ष रह चुके हैं।
  •  Ncf-2005 की रूपरेखा के लिए राष्ट्रीय संचालन समिति ने 21 राष्ट्रीय फोकस समूहों का गठन किया।
  • Ncf-2005 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि बालक की प्राथमिक स्तर की शिक्षा स्थानीय भाषा या घरेलू भाषा में होनी चाहिए।
  • यदि प्राथमिक स्तर की शिक्षा देने के लिए अध्यापक उपलब्ध नहीं है तो संविधान के अनुच्छेद 350 (क) के तहत स्थानीय शिक्षा अधिकारी को बालक की भाषा के विकास के लिए उसे स्थानीय भाषा मैं शिक्षण कार्य करवाने के लिए एक शिक्षक उपलब्ध कराना चाहिए।

  • 3  भाषाओ के फॉर्मूले 
  1. प्रथम भाषा राज्य या राष्ट्रीय भाषा जैसे - हिंदी 
  2.  द्वितीय भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा - अंग्रेजी  
  3. तृतीय भाषा स्थानीय भाषा - मारवाड़ी गुजराती मराठी पंजाबी आदि
  • जब बालकों में सामाजिक विज्ञान का अध्ययन कराया जाए तो विद्यार्थियों में आलोचनात्मक व मानसिक जागरूकता विकसित करनी चाहिए।
  • विज्ञान विषय का शिक्षण जब बच्चों को कराया जाए तब बालकों में तार्किक एवं संज्ञानात्मक चिंतन का विकास करवाना चाहिए।
  • बालकों को शिक्षण कार्य कराने के बाद उनको यह भी सिखाना चाहिए कि दूसरों की भलाई के लिए कोई आवश्यक कदम उठाएं।
  • बालकों में नवीन परिस्थितियों से सामना करने की क्षमता उनके अंदर विकसित करनी चाहिए।
  • एक शिक्षक को बालक के संपूर्ण ज्ञान को पाठशाला के बाहरी जीवन से जोड़ देना चाहिए।
  • बालकों को किसी भी विषय को रटकर  तैयार नहीं करवाना चाहिए उनकी शिक्षण प्रक्रिया रटन्त पद्धति से मुक्त होनी चाहिए।
  • बालक का पाठ्यक्रम इस प्रकार से तैयार किया जाना चाहिए कि बालक का विकास चहुँमुखी दिशा में हो।
  • शिक्षण विधि शिक्षण का एक माध्यम या साधन है।
  • वाइनिंग कहते हैं कि शिक्षण विधि शिक्षण प्रक्रिया का गतिशील कार्य है।
  • शिक्षण विधियां किसी शिक्षक के व्यवहार का एक दर्पण हैं। शिक्षण विधियां एक से अधिक विषयों हेतु उपयोगी होती हैं।
  • ऐडम्स कहते हैं कि शिक्षा दर्शन का गत्यात्मक साधन है।
  • शिक्षण विधियां विषय वस्तु के व्यवहारिक संप्रेषण में सहायक होती हैं।
  • शिक्षण विधियां शिक्षक तथा विद्यार्थियों के मध्य अंतः क्रिया उत्पन्न करती हैं।
शिक्षण शास्त्र में शिक्षण विधियां तीन प्रकार की हैं।

परंपरागत विधि - परंपरागत विधि के अंतर्गत बालक अपनी पाठ्य पुस्तक से पड़ता है उसे परंपरागत साधन के रूप में प्रयोग करता है।

शिक्षक केंद्रित विधि - शिक्षक केंद्रित विधि में बालक शिक्षक की बातों को सुनता है। बालक कक्षा में मुक श्रोता के रूप में होता है शिक्षक केंद्रित विधि के अंतर्गत व्याख्यान पद्धति और कहानी पद्धति को रखा गया है।

बालक केंद्रीय विधि - बाल केंद्रित विधि में बालक सक्रिय होकर सीखता है इस विधि में योजना विधि समस्या समाधान विधि विचार-विमर्श विधि प्रयोगशाला विधि निरीक्षण या पर्यवेक्षक अध्ययन विधि को रखा गया है इस विधि में बालक की भूमिका होती है।

  • शिक्षण विधि में पाठ्यवस्तु के प्रस्तुतीकरण की ओर ध्यान दिया जाता है।
  • एजुकेशन शब्द लैटिन भाषा की एडुकेटम से निकला है। एडूकेटम का अर्थ होता है अंदर से बाहर की ओर बढ़ना
  • शिक्षा एक द्विमुखी प्रक्रिया है यह जॉन ऐडम्स ने कहा इसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों की मध्य अंतः क्रिया होती है।
  • शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है यह जॉन डीवी ने कहा इसमें पाठ्यक्रम विद्यार्थी और शिक्षक तीनों में अंत: संबंध होता है।
  • शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण ब्लूम ने किया ब्लूम ने  शिक्षण तथा मूल्यांकन को उद्देश्य आधारित बनाने का सफल प्रयास किया था।
  • ज्ञान संज्ञानात्मक क्षेत्र की सबसे छोटी इकाई होती है।
  • क्रियात्मक पक्ष का सबसे उच्चतम स्तर माना गया है आदत निर्माण को
  • स्कूल से भागने वाले बालक के अध्ययन की सर्वाधिक उपयोगी विधि 'केस स्टडी विधि' को माना गया है।
  • स्कूल के एक अध्यापक की उपमा बगीचे के एक माली से की जाती है।
  • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 की  कार्यशाला नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
  • एक अध्यापक का सबसे विशेष गुण होता है सहनशीलता
  • हरबर्ट में शिक्षण के 5 औपचारिक पद दिए हैं।
  • किंडर गार्डन पद्धति में शिक्षक की भूमिका पथ प्रदर्शक के रूप में होती है।
  •  सीखने का सबसे सही तरीका करके सीखना है।
  • शिक्षण प्रक्रिया में विद्यार्थी एक आश्रित चर होता है।
  • Ncf-2005 करके सीखने पर बल देता है।
  • विज्ञान शिक्षण की वह विधि जिसमें विद्यार्थी को एक खोजी के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाता है उसे ह्यूरिस्टिक विधि कहते हैं।
  • आगमन विधि में छात्र विशिष्ट से सामान्य की ओर अग्रसर होता है।
  • एनसीएफ 2005 के अनुसार गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में तार्किक चिंतन तथा समस्या समाधान योग्यताओं को विकसित करना है।
  • विद्यालय की कक्षाओं में शिक्षण की खेल विधि विकास व वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती है।
  •  राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में कहा गया है कि ज्ञान स्थाई होता है और ज्ञान से ही ज्ञान का विकास होता है।
  • Ncf-2005 के अनुसार गणित शिक्षण बाल केंद्रित होना चाहिए।
  • शिक्षण प्रक्रिया को रोचक बनाने के लिए दृश्य श्रव्य सामग्री सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है।
  • सूक्ष्म शिक्षण का समय 5-10 मिनट माना गया है।
  •  दलिय शिक्षण पद्धति का प्रारंभ अमेरिका में हुआ था।
  • प्रोजेक्ट विधि का सबसे पहले प्रयोग किलपैट्रिक द्वारा किया गया था।
  • डाल्टन शिक्षण विधि का विकास मिस हेलेन पार्कहर्ट ने किया था।
  • ज्ञानात्मक पक्ष के सबसे अंतिम स्तर मूल्यांकन को माना गया है।
  •  कक्षा में शिक्षण की खेल विधि विकास और वृद्धि के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित होती है।
  • लघु पदों के सिद्धांत का संबंध रेखीय अभिक्रमित से होता है।
  • स्मिथ ने शिक्षण की वृद्धि हुई प्रक्रिया में शिक्षक को कार्यवाहक माना
  • रचनात्मक प्रश्नो  के लिए मुक्त उत्तर वाले प्रश्न आवश्यक है।
  • आधुनिक अभिक्रमित अनुदेशन की उत्पत्ति का कारक मनोविज्ञान और तकनीक है।
  •  वर्तमान समय में शिक्षा का सबसे उपयुक्त उपागम सृजन वादी उपागम माना गया है।
  •  कक्षा में शिक्षक और विद्यार्थियों के मध्यम उद्देश्य केंद्रित बातचीत( संप्रेषण) होना चाहिए।
  • बाल केंद्रित शिक्षा के अंतर्गत बालकों को गृह कार्य नहीं देना चाहिए।
  • प्रयोजना विधि के प्रतिपादक किलपैट्रिक को माना गया है।
  • वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका एक सुगमकर्ता के रूप में मानी गई है।
  • एक शिक्षक दृश्य श्रव्य सामग्री की सहायता से अपने अध्यापन कार्य को सरल बना सकता है।

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपके लिए लेकर आए हैं Ncf-2005 के ONE LINER FEKTAR प्रश्न लाये है। अनुच्छेद 350 (क) एक ऐसा Topic है जो किसी भी Tet एग्जाम में पहुंच जाता है और यहां से प्रश्न लगातार पूछे गए हैं आप लोगों को हमारी यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट करके बताएं और हमें फॉलो करें।





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