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वंशानुक्रम व वातावरण-Heredity & Environment

वंशानुक्रम व वातावरण-Heredity & Environment
वंशानुक्रम व वातावरण-Heredity & Environment
वंशानुक्रम-वातावरण 


1. वंशानुक्रम - 

जब बालक मां के गर्भ में आता है तब बालक में अपने माता-पिता और पूर्वजों से प्राप्त गुण उस बालक में हस्तांतरित हो जाते हैं ,और इस मिश्रण के समूह को ही हम वंशानुक्रम कहते हैं।

वास्तव में वंशानुक्रम एक अमूर्त तथा जैविक की दृष्टि से अत्यंत जटिल धारणा है व्यक्ति के जन्मजात गुण ही उसका वंशानुक्रम कहलाते हैं।

2.मानव का विकास दो कारको में होता है - 

1.जैविक कारक - जैविक कारक से तात्पर्य है, जब बालक में माता पिता के गुण ट्रांसफर होते हैं उसे हम जैविक कारक कहते हैं।

2. सामाजिक कारक - जब बालक वातावरण में रहकर अपना सामाजिक और मानसिक विकास करता है , इसे सामाजिक कारक कहते हैं।

बालक के जन्म से संबंधित विकास को वंश क्रम तथा समाज से संबंधित विकास को वातावरण कहते हैं।

3.वंशानुक्रम की प्रक्रिया

वैज्ञानिक दृष्टि से एक मानव शरीर कोषो का योग होता है , जिन्हें हम कोशिकाएं/Sell कहते हैं। मानव के विकास का प्रारंभ एक कोष से होता है। जिसे हम संयुक्त कोष कहते हैं।
संयुक्त कोष में 1 गुणसूत्र माता का और दूसरा गुणसूत्र पिता का होता है। प्रत्येक गुणसूत्र में 3000 पित्रैक होते है।

गुणसूत्रों की संख्या 46 होती है, जिसमें 23 जोड़ें पुरुष के और 23 जोड़े स्त्री के होते हैं। स्त्रियों में XX गुणसूत्र होते हैं और पुरुषों में XY गुणसूत्र होते हैं पुरुषों का 23 वा गुणसूत्र लंबा होता है। 

यदि XX गुणसूत्र हैं तो लड़की पैदा होती है और यदि XY गुणसूत्र है तो लड़का पैदा होता है। लड़का या लड़की का होना पुरुष के गुणसूत्र पर डिपेंड होता है।

 वंशानुक्रम के कारण बालकों में सारिक भिन्नता पाई जाती है।

वंशानुक्रम के नियम 

1. समानता का नियम -  इस नियम के अनुसार जो गुण माता-पिता में विद्यमान होते हैं वही गुण उनके बच्चों में आ जाते हैं। यदि बालक के माता-पिता बुद्धिमान हैं तो बालक भी बुद्धिमान होगा। इस नियम के अनुसार पशु पशु को जन्म देता है और एक मानव मानव को जन्म देता है न कि पशु को


2. भिन्नता का नियम - इस नियम के अनुसार यदि मां-बाप प्रतिभाशाली है तो जरूरी नहीं है कि बच्चे भी प्रतिभाशाली हो। माता पिता और उनके बच्चे में भिन्नता देखी जाती है।


3. प्रत्यागमन का नियम - इस नियम के अनुसार माता-पिता से ठीक विपरीत संतान होती है यदि माता-पिता काले हैं तो उनके बच्चे गोरे होने यदि माता-पिता मंदबुद्धि है तो बच्चे प्रतिभाशाली होंगे


वंशानुक्रम के सिद्धांत


1. बीजकोष का सिद्धांत -  इस सिद्धांत के प्रवर्तक बिजमैन थे बीजमेन ने कई चूहों पर प्रयोग किए जिसमें उन्होंने कई चूहों की पूछो को कांटा लेकिन कोई भी पूछ विहीन चूहा पैदा नहीं हुआ।
इससे यह सिद्ध होता है कि व्यक्ति का बीजकोष कभी समाप्त नहीं होता वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित होता रहता है।

2. अर्जित गुणों के संक्रमण का सिद्धांत - इस नियम के अनुसार जो गुण बालक के माता पिता में है वह गुण बालक में स्थानांतरित होते हैं उन गुणों को संतान प्राप्त करता है।

3. मेंडल का सिद्धांत - मेंडल ने मटर के पौधों पर प्रयोग किया मेंडल ने कई छोटी और बड़ी मात्रा में मिलाकर बॉय अंत में उगने वाली शुद्ध मटर एक जैसी थी इन्हें आनुवंशिकी का जनक भी कहते हैं।

4. गोल्डन का जीव सांख्यिकी का सिद्धांत - के सिद्धांत के अनुसार बालक में घोड़ों का हस्तांतरण केवल माता-पिता से ना होकर पूर्वजों से भी होता है।

5. डार्विन का सिद्धांत - निरंतर बदलती परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन पर बल दिया है।

वंशानुक्रम विज्ञान बताता है कि प्रत्येक व्यक्ति का शारीरिक तथा मानसिक विकास काफी सीमा तक उसके वंशानुक्रम पर निर्भर करता है।

वातावरण


हमारे चारों ओर का संपूर्ण पर्यावरण जो हमें चारों ओर से गिरे हुए हैं वही हमारा वातावरण है। शिक्षा मनोविज्ञान में वातावरण को दो भागों में बांटा गया है।
1. आंतरिक वातावरण - आंतरिक वातावरण से तात्पर्य मां के गर्भ से है इसे हम अंतः कोशीय वातावरण कहते हैं। अतः हम कह सकते हैं कि मां के स्वस्थ होने पर बालक भी स्वस्थ होता है।

2. बाहर का वातावरण - बाहर के वातावरण के अंतर्गत वे सभी परिस्थितियां आती हैं जो बालक के व्यवहार को प्रभावित करती है।
जैसे - पेड़-पौधे हवा, घर भोजन आदि।

बालक पर वातावरण का प्रभाव


1. भिन्न-भिन्न वातावरण के कारण अमेरिका और भारत के लोगों में शारीरिक भिन्नता पाई जाती है।

2. हम देखते हैं कि शहरों में शिक्षा को महत्व दिया जाता है इस कारण शहर के बच्चों का मानसिक विकास गांव में रहने वाले बच्चों से अधिक होता है।

3. अमेरिका में 2 प्रजातियां पाई जाती हैं एक होते हैं श्वेत दूसरे होते हैं नीग्रो प्रजाति के लोग लेकिन गोरे लोगों की प्रजाति का बुद्धि स्तर नीग्रो प्रजाति से अधिक होता है।

4.वातावरण का बुद्धि पर वंशानुक्रम की अपेक्षा अधिक प्रभाव पड़ता है।

5. वातावरण बालक के शारीरिक मानसिक सामाजिक संवेगात्मक आदि सभी पक्षों पर प्रभाव डालता है।

6. वातावरण से बालक के चरित्र का निर्माण होता है।

7. बालक को समाज में रहने की प्रेरणा विद्यालय वातावरण से मिलती है।

दोस्तों इस पोस्ट में हमने आपको विस्तार से वंशानुक्रम और वातावरण टॉपिक को समझाया है और हमें उम्मीद है कि आपको यह टॉपिक समझ में आया होगा यदि आपका कोई दोस्त टेट एग्जाम की तैयारी कर रहा है तो आप इसे जरूर शेयर कीजिए और हमारी वेबसाइट पर विजिट करते रहिये।



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