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कोरोना वायरस से लड़ने के लिये ये 5 योगासन प्रतिदिन करे- coronavirus se Ladne ke liye Ye 5 yogasan Pratidin Kare

कोरोना वायरस से लड़ने के लिये ये 5 योगासन प्रतिदिन करे- coronavirus se Ladne ke liye Ye yha  5 yogasan Pratidin Kare
कोरोना वायरस से लड़ने के लिये ये 5 योगासन प्रतिदिन करे- coronavirus se Ladne ke liye Ye yah 5 yogasan Pratidin Kare
कोरोना-वायरस-से-लड़ने-के-लिये-ये-5 योगासन-प्रतिदिन-करे


आसन केवल शारीरिक प्रक्रिया मात्र नहीं है बल्कि आसन से मानसिक क्षमता का विकास होता है, सुख पूर्वक स्थिरता से लंबे समय तक एक स्थिति में ठहरना आसन है।

योग एक स्वस्थ जीवन जीने की कला है योग करने से व्यक्ति निरोगी एवं स्वस्थ रहता है, योग एकाग्रता प्राप्ति का साधन है।

लेकिन आज जो परिस्थितियां हैं उन परिस्थितियों से लड़ने के लिए व्यक्ति को प्रतिदिन योगाभ्यास करना चाहिए योगाभ्यास करने से हम कोरोना वायरस से लड़ सकते हैं और शरीर में इम्यूनिटी पैदा कर सकते हैं।

योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर में आलस नहीं रहता जिससे व्यक्ति पूरे दिन बिना थकावट के लगातार कार्य करता रहता है।

आज हम आपको कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पांच 5 योगासन बता रहे हैं जिन्हें आपको प्रतिदिन अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना है, इससे आपके शरीर का इमन्युटी सिस्टम ठीक रहेगा और आपका शरीर रोगों से मुक्त होगा।


कोरोना वायरस से लड़ने के लिए यह 5 योगासन प्रतिदिन करें!


1. पद्मासन
कोरोना वायरस से लड़ने के लिये ये 5 योगासन प्रतिदिन करे

इस आसन की मुद्रा खुले हुए कमल की तरह होती है इसलिए इस आसन को पद्मासन कहते हैं।

पद्मासन की विधि 



  1. दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर पर बैठ जाएं।
  2. सर्वप्रथम दोनों हाथ से बाएं पैर को एडी पंजे से पकड़कर उठाया और पेट से स्पर्श करते हुए दाहिनी जंघा पर रखें।
  3. पुनः दोनों हाथ से दाएं पैर की एड़ी पंजे से पकड़कर पेट से स्पर्श करते हुए बाई जंघा पर स्थापित करें दोनों घुटनों को जमीन से टिकाने का प्रयास करें।
  4. हाथों की दोनों हथेली को ज्ञान मुद्रा बनाकर घुटनों पर इस प्रकार रखें कि हथेली का पृष्ठ भाग नीचे की ओर हो।
  5. अपनी रीड की हड्डी सीधी रखें आंखें बंद कर कुछ सेकंड सास पर ध्यान दें मन को सांस पर लगाएं।

पद्मासन से लाभ


  1. पद्मासन से सभी रोग हटते हैं।
  2. मन एकाग्र होता है।
  3. पद्मासन ध्यान के लिए उत्तम आसन है।
सावधानियां

यदि आपकी रीड की हड्डी में दर्द है तो आप इस आसन को ना करें इस आसन को बलपूर्वक ना करें।

2. कर्णपीड़ासन

इस आसन में कानों पर दबाव डाला जाता है, जो लोग कान की समस्या से परेशान हैं उनके लिए यह आसन लाभकारी है।

विधि

  1. सीधे लेट जाये 
  2. दोनों पैरों को सिर की ओर ले जाकर टिका दें
  3. दोनों घुटनों को दोनों कान के समीप जमीन पर स्थापित कर कानों से लगा दें।
  4. सांस पूरी तरह बाहर निकाल दें फिर धीरे-धीरे सांस लें।
  5. आंखों को खुला रखें जितना हो सके रुकने का प्रयास करें।
  6. कमर को धीरे-धीरे जमीन पर टिका दें फिर पैरों को जमीन पर लाएं और विश्राम करें।


लाभ



  1. इस आसन के निरंतर अभ्यास करने से मस्तिक ,नाक ,कान गला, नेत्र आदि संबंधित बीमारियां नहीं होती
  2. इस आसन से मोटापा ,श्वास रोग ,दमा ,कब्ज ,रक्त दोष आदि दूर होते हैं।
  3. हृदय व फेफड़े पुष्ट होते हैं।
  4. रक्त का प्रवाह सिर के भाग में तीव्र होने से मानसिक शक्ति बढ़ती है।

सावधानियां


यदि आपके कंधे में दर्द ,कान बह रहा हो या नेत्र रोग हो अधिक सर्दी जुखाम हो तो इस आसन को ना करें।

3. हलासन


इस आसन की आकृति हल के समान बनती है इसलिए इस आसन को हलासन कहते हैं।

विधि



  1. पीठ के बल दोनों पैर मिलाकर सीधे लेट जाइए। दोनों हाथ सीधे जंघाओं के पास ,हथेलियां खुली हुई जमीन से सटी रहेंगी। हथेलियों का पृष्ठ भाग ऊपर की ओर रहेगा
  2. धीरे-धीरे हाथों पर बल देकर दोनों पैर बिना घुटनों से मोड़ें उठाइए तथा 30 डिग्री के कोण पर रुक जाइए।
  3. 5 सेकंड रुकने के बाद 60 डिग्री कोण तक पाओं को ऊपर उठाइए बस थोड़ी देर रुकिए
  4. अब धीरे से दोनों पैरों को 90 डिग्री के कोण पर ले आइए।
  5. दोनों हाथों को जोर दीजिए, पैरों को थोड़ा सिर की ओर झुक आइए।
  6. पैरों को तब तक झुकाते जाइए जब तक आप पैरों की उंगलियों से भूमि का स्पर्श ना कर लें।
  7. अब दोनों हाथों की पंजे सिर के ऊपर ले जाकर एक दूसरे में फंसा ले।
  8. वापस आते समय पहले हाथों के पंजे खोलिए और हाथ सीधा करके शरीर के बगल में जमीन पर ले आइए

4. सर्पासन


फन को ऊपर की ओर उठाएं हुए सर्प जैसी आकृति बनने के कारण इसे सर्पासन कहते हैं।

विधि

  1. हथेलियों को कंधों के बगल में जमीन पर स्थापित करें।
  2. सांस भरते हुए पेट तक धड़ को हाथों के बल ऊपर उठाएं।
  3. ऊपर की ओर देखते हुए क्षमतानुसार रुके श्वास सामान्य करें।
  4. श्वास छोड़ते हुए पहले जैसी स्थिति में पेट के बल लेट जाएं।
  5. 3 से 5 बार करे।


लाभ



  1. पेट एवं कमर संबंधी रोग दूर होते हैं।
  2. रीड तथा कमर में लोच बढ़ती है।
  3. फेफड़े एवं हृदय स्वस्थ होते हैं।
  4. कब्ज दूर होता है।

5. शलभासन


इस आसन की स्थिति टिड्डे के बैठने जैसी स्थिति में मिलती है आकृति बनने के कारण इसे शलभासन कहते हैं।

विधि 



  1. पेट के बल लेट जाएं।
  2. दोनों हथेलियों को जमीन पर जंघा के नीचे हथेली का तल भाग नीचे रखकर स्थापित करें।
  3. गर्दन को बाय मोड़ें और सांस भरकर बाएं पैर को घुटने से सीधा रखते हुए जमीन के ऊपर उठाएं क्षमता अनुसार रुके सांस छोड़कर पैर को वापस नीचे लाएं।
  4. इसी प्रकार गर्दन को दाएं मोड़े सांस भरकर दाहिने पैर को घुटने से सीधा रखते हुए जमीन से ऊपर उठाएं क्षमतानुसार रुके श्वास छोड़ते हुए पैर को वापस लाएं।
  5. पुनः बाय अथवा मध्य में ठुड्डी को जमीन पर लगाते हुए सामने देखें । दोनों पैर एक साथ ऊपर उठाएं सांस छोड़कर वापस लाएं।
  6. इसी प्रकार दाएं अथवा मध्य में ठुड्डी को जमीन पर लगाते हुए सामने देखें । दोनों पैर एक साथ ऊपर उठाएं सांस छोड़कर पैर वापस जमीन पर टिका दें।
  7. आसन को दोनों पैरों से तीन तीन बार करें।
  8. अधिक अभ्यास होने पर दोनों पैरों को इतना ऊपर उठाये की पेट तथा पेंडू सहित भूमि से 90 डिग्री का कोण बनाएं।

लाभ



  1. कब्ज दूर होता है पाचन शक्ति बढ़ती है।
  2. नाडिया शुद्ध होती हैं हृदय एवं फेफड़े पुष्ट होते हैं।
  3. क्लोम ग्रंथि सक्रिय होने से मधुमेह की बीमारी मिटती है।
  4. चेहरा कांति वान बनता है नेत्रों को लाभ होता है।

सावधानियां

अल्सर रोग से पीड़ित व्यक्ति इस आसन का अभ्यास न करें।







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