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शिक्षा मनोविज्ञान 2020: विशेष आवश्यकता वाले बालक-Vishesh Aavshykta Vale Balak

शिक्षा मनोविज्ञान 2020: विशेष आवश्यकता वाले बालक-Vishesh Aavshykta Vale Balak



विशेष आवश्यकता वाले बालक 

वे बालक होते हैं जो या तो सामान्य बालकों से बहुत आगे होते हैं या सामान्य बालको से बहुत पीछे होते हैं इन बालकों में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा संवेगात्मक रूप में भिन्नता पाई जाती है। किसी भी अंग से हीन बालक मंदबुद्धि वाले बालक ,विकलांग बालक ,समस्या ग्रस्त बालक ,बाल अपराधी बालक, सृजनात्मक बालक ,प्रतिभाशाली बालक विशेष आवश्यकता वाले बालक होते हैं।

Vishesh Aavshykta Vale Balak-विशेष आवश्यकता वाले बालक
विशेष-आवश्यकता-वाले-बालक 

परिभाषाएं


कुर्क - वह बालक जो शारीरिक मानसिक संवेगात्मक बौद्धिक दृष्टि में सामान्य बालकों से भिन्न होते हैं विशेष आवश्यकता वाले बालक कहलाते हैं।


हैक - विशिष्ट बालक वह बालक है जो कई दृष्टि से सामान्य बालक से भिन्न होता है।


विशेष आवश्यकता वाले बालकों का वर्गीकरण चार आधारों पर किया गया है।
1. बौद्धिक आधार पर - दो प्रकार के बालक होते हैं।

 A. प्रतिभाशाली बालक (God Gift)
 B. मंदबुद्धि बालक (M.R)


2. शैक्षिक आधार पर - दो प्रकार के बालक होते हैं।

 A. तीव्र गति से सीखने वाले बालक
 B. पिछड़े बालक


3. शारीरिक दृष्टि के आधार पर - 6 प्रकार के बालक होते हैं।

A. बहरे बालक
B.कम सुनने वाले बालक
C.नेत्रहीन बालक
D.दृष्टि दोष बालक
E.वाणी दोष बालक
F.विकलांग बालक


4. समस्याग्रस्त बालक

1.सामाजिक दृष्टि से अस्थिर बालक
2.संवेगात्मक दृष्टि से अस्थिर बालक


A. प्रतिभाशाली बालक


बेंटले - वह बालक जिनका IQ 110 के ऊपर हो उन्हें प्रतिभाशाली बालक कहेंगे

हैक - वह बालक जिनका IQ 125 से ऊपर हो उन्हें प्रतिभाशाली बालक कहेंगे

क्रो एन्ड क्रो - प्रतिभाशाली बालक दो प्रकार के बताये
1. वह बालक जिनका I.Q 130 से अधिक होता है और जो सामान्य बालकों से सभी बातों में श्रेष्ठ होते हैं प्रतिभाशाली बालक हैं।
2. उन बालकों को ही हम प्रतिभाशाली बालक कहेंगे जो किसी विशेष क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं जैसे - कला संगीत खेलकूद नृत्य

बुद्धि लब्धि के आधार पर प्रतिभाशाली बालक 2% है।
जिन बालकों का I.Q 140 है उन्हें प्रतिभाशाली बालक कहेंगे।

Note- प्रतिभाशाली बालकों के लिए प्रयोजना विधि का प्रयोग किया जाता है, इस विधि के जनक किलपैट्रिक हैं।


प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताएं



  • प्रतिभाशाली बालकों का I.Q 125 होता है और टरमन के अनुसार 140
  • प्रतिभाशाली बालक संवेगात्मक रूप से स्थिर होते हैं यह अपने संवेगों पर नियंत्रण कर लेते हैं।
  • प्रतिभाशाली बालक कठिन मानसिक कार्य करते हैं
  • प्रतिभाशाली बालकों का समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होता है।
  • प्रतिभाशाली बालक आलोचनात्मक चिंतन ,विवेचनात्मक चिंतन ,अमूर्त चिंतन करते हैं।
  • प्रतिभाशाली बालकों में कल्पनात्मक चिंतन अधिक विकसित होता है।
  • यह बालक किसी भी कार्य पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं
  • प्रतिभाशाली बालक अपने ग्राम या समुदाय में अधिक लोकप्रिय होते हैं।
  • प्रतिभाशाली बालक अपनी पाठ्यक्रम के अलावा दूसरी चीजों में भी अधिक रूचि लेते हैं।
  • प्रतिभाशाली बालकों में अधिक जिज्ञासा होती है इन बालकों का उद्देश्य लक्ष्य केंद्रित होता है।
  • प्रतिभाशाली बालकों में विद्रोह हो तथा नकारात्मक प्रवृतियां भी पाई जाती हैं।
  • प्रतिभाशाली बालक लिखने में लापरवाह होते हैं।
  • प्रतिभाशाली बालक व्यवहारिक ज्ञान ,स्पष्ट चिंतन और सूक्ष्म अवलोकन करते हैं।


प्रतिभाशाली बालकों की पहचान



  • परीक्षण के द्वारा - मानसिक आयु × 100

                                      वास्तविक आयु


  • अवलोकन द्वारा
  • विद्यालय अभिलेखों 


B. मंद बुद्धि बालक  (मेंटली रिटायर्ड)


यह बालक मानसिक दृष्टि से पिछड़े बालक होते हैं इन बालकों का I.Q 70 से कम होता है मंदबुद्धि वाले बालक 3 प्रकार के होते हैं।

1.EMR - इन बालकों को एजुकेशन दी जा सकती है,इन बालकों का I.Q 50 से 70 के बीच होता है।
2.TMR - इन बालकों को ट्रेनिंग दी जा सकती है,इन बालकों का I.Q 25 से 50 होता है।
3.CMR - यह बालक मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं इन बालकों को कस्टडी में रखा जाता है इन बालकों का I.Q 0-25 के बीच होता है।

मंदबुद्धि बालकों की विशेषताएं



  • इन बालकों में संवेदी गामक विकास मंद/धीमा होता है।
  • मंदबुद्धि बालक अपनी आवश्यकता की अभिव्यक्ति नहीं कर पाते हैं।
  • शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य और विकास खराब होता है।
  • मंदबुद्धि वाली पालक चिंतन,कल्पना नहीं कर पाते हैं।
  • मंदबुद्धि वाले बालकों का स्मृति स्तर तथा ध्यान स्तर कम होता है।
  • यह बालक किसी भी वस्तु ,पदार्थ ,उद्दीपक पर अधिक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं।
  • इन बालकों में असफलता का भय रहता है।
  •  सामाजिकता समायोजन समस्याओं से ग्रसित होते हैं।
  • आत्मनिर्भरता की कमी भाषा का पूर्ण ज्ञान नहीं होता है।
  • व्यवहारिक ज्ञान की कमी तार्किक चिंतन सामान्य समझ विकसित नहीं होता है।
  • मंदबुद्धि वाले बालक कार्य और कारण में संबंध स्थापित नहीं कर पाते


मंदबुद्धि वाले बालकों के कारण


1.गुण सूत्र में कमी वैसे गुणसूत्र 46 होते हैं लेकिन सूत्रों में एक कम या एक ज्यादा होने पर मंदबुद्धि बालक होते हैं।
2. अंडाणु के निषेचन में कोई दोष उत्पन्न होने पर मंदबुद्धि वाले बालक पैदा होते हैं।
3.जन्म के समय रोग होने पर जैसे- कुपोषण,चोट,दुर्घटना

मंदबुद्धि बालकों के लिए विशेष विद्यालय


1.मंदबुद्धि बालकों के लिए विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना की जाती है प्रतिभाशाली बालकों के लिए अलग कक्षाएं और मंदबुद्धि बालकों के लिए पृथक कक्षाएं
2. विद्यालयों में एक पाठ्यक्रम को बार-बार रिपीट करना चाहिए।
3. भारत में सामाजिकता के कौशल का विकास करना चाहिए
4. मंदबुद्धि बालकों के लिए श्र्वय-दृश्य सामग्रियों का उपयोग किया जाना चाहिए
5. हस्तशिल्प तथा कौशलों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

मंदबुद्धि बालकों की पहचान कैसे करेंगे

1.अवलोकन के द्वारा
2.परीक्षण के द्वारा
3.शैक्षिक उपलब्धि के आधार पर
4.विद्यालय अभिलेखों के द्वारा
5.जीवन इतिहास विधि
6.गाथा विधि के द्वारा
7.केस स्टडी विधि



C. पिछड़े बालक

पिछड़े बालक उन बालकों को कहा जाता है जो सामान्य बालकों से किसी कारण पीछे रह जाते हैं। पिछड़े बालक मंदबुद्धि वाले बालक हो ऐसा जरूरी नहीं है एक प्रतिभाशाली बालक और मंदबुद्धि वाला बालक तीव्र बुद्धि वाला बालक भी पिछड़ा बालक हो सकता है।

पिछले बालकों की पहचान कैसे करेंगे



  • पिछले वाला क्षेत्र बनाने तकनीक का प्रयोग करने गामक कौशलों के उपयोग में कमजोर होते हैं
  • असमर्थ भाषा अशुद्ध भाषा का प्रयोग करते हैं।
  • पिछड़े बालक उत्तर दायित्व की क्षमता सीमित होती है।
  • इन बालकों में निराशा को समायोजन ,असफलता का भय होता है यह जिज्ञासु नहीं होते हैं।
  • पिछड़े बालक दूसरे बालकों पर निर्भर होते हैं।
  • पिछड़े बालक किसी विषय वस्तु का सामान्य करण नहीं कर पाते हैं।
  • यह बालक स्वप्न में खोए रहते हैं।
  • पिछले बालकों में नकारात्मक प्रवृतियां पाई जाती हैं।
  • पिछड़े बालकों की बुद्धि लब्धि 80 से 90 होती है।


पिछड़ेपन के प्रमुख कारण


1.शारीरिक दुर्बलता
2.मानसिक रूप से दुर्बल
3.बौद्धिकता
4.बीमारी के कारण
5.कुपोषण के कारण
6.पारिवारिक वातावरण
   A.आर्थिक स्थिति कमजोर
   B.बच्चों की अधिक संख्या
   C.परिवार में झगड़े
   D.पाठ्यक्रम में बदलाव

पिछड़े बालकों के लिए शिक्षा



  • पिछड़े बालकों के लिए विद्यालय में अच्छे शिक्षकों की नियुक्ति करना चाहिए
  • पिछड़े बालकों के लिए विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए व विशिष्ट कक्षाओं की स्थापना की जानी चाहिए
  • बालकों को अभी प्रेरित किया जाना चाहिए।
  • पिछले बालकों को सरल शिक्षण विधि का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • बालकों को छोटे-छोटे समूहों में शिक्षा दी जानी चाहिए
  • शिक्षक कोमाता पिता के संपर्क में रहना चाहिए।
  • बालक में आत्म सुरक्षा ,आत्मनिर्भरता ,की भावना का विकास करना चाहिए।


पिछड़े बालकों की पहचान

1.परीक्षण के द्वारा 2.अवलोकन के द्वारा 3.व्यक्तिगत परीक्षण 4.निदानात्मक परीक्षण

D. विकलांग बालक

विकलांग बालक वे बालक होते हैं, जिनके शरीर का कोई भी एक अंग कार्य नहीं करता विकलांग बालक तीन प्रकार के होते हैं। विकलांग बालकों को अलग विद्यालयों में सामान्य बालकों से हटकर शिक्षा दी जाती है यदि कोई बालक अंधा है तो उसे लुइ ब्रेल लिपि के द्वारा शिक्षा दी जाती है यदि कोई बालक गूंगा है तो उसे सांकेतिक विधि के द्वारा पढ़ाया जाता है।
यदि कोई बालक जन्मजात बहरा है तो वह आवश्यक रूप से गूंगा होगा। लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि गूंगा बालक बहरा हो
1. अंधे बालक 2. गूंगे बालक 3. गूंगे बहरे बालक

E. बाल अपराधी बालक

जिन बालकों की आयु 18 वर्ष से कम होती है उन्हें बाल अपराधी बालक कहा जाता है। बाल अपराध विज्ञान का जनक सीजर लंब्रोसो को माना जाता है।
जो बालक अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति गलत तरीके से करते हैं या समाज के विरुद्ध जाकर करते हैं उन्हें बाल अपराधी बालक की श्रेणी में रखा जाता है। यदि कोई बालक अपराध करता है तो उन्हें विशेष बंदी गृह में रखा जाता है जहां उनकी शिक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है। इनको बोस्टर्ल संस्थाएं सुधारती हैं।

बाल अपराधी बालकों की विशेषताएं
1.बाल अपराधी बालक  मांसपेशियों से युक्त या आयताआकृति आकार के होते हैं।
2. बाल अपराधी बालक तुरंत दुश्मनी मोल ले लेते हैं। यह बालक संदेही प्रवृत्ति के होते हैं
3. ऐसे बालकों में इसने है तथा नैतिकता का अभाव होता है।
4. बाल अपराधी बालक चिड़चिड़ी प्रवृत्ति के होते हैं।

Note - हकलाने तुतलाने वाले बालकों के लिए स्पीच थेरेपी का प्रयोग किया जाता है।



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