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Teaching Methods of Meth | गणित अध्ययन शिक्षण विधियां| Meth Pedagogy Notes



गणित अध्ययन की शिक्षण विधियां(Meth Pedagogy)

दोस्तों Digitallarning.com में आपका स्वागत है, आज के इस आर्टिकल में हम आपके लिए  गणित अध्ययन की शिक्षण अधिगम की विधियां( teaching method in hindi)(Teaching Methods of Meth) शेयर कर रहे हैं। इस आर्टिकल में आपको meth की सभी विधियों के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार पूर्वक प्राप्त होगी गणित पेडगॉजी(Meth Pedagogy Notes) के अंतर्गत गणित की शिक्षण विधियों से भी प्रश्न पूछे जाते हैं।  इसी को ध्यान में रखते हुए इस आर्टिकल में हमने गणित की विधियां जैसे आगमन विधि  ,निगमन विधि ,व्याख्यान विधि  ,खोज विधि  विश्लेषण विधि , संश्लेषण विधि  ,प्रयोगशाला विधि इन सभी विधियों के बारे में विस्तार पूर्वक इस आर्टिकल में बताया गया है।


Teaching Methods of Meth

मनोवैज्ञानिक अवधारणा  (Psychological concept)

वेदांग ज्योतिष के अनुसार - जिस प्रकार से मयूर ओके फिर पर कलंगी और सिखों के सिर पर मणि शोभायमान है उसी प्रकार से ज्योतिष विद्वानों में गणित शोभायमान है।

रोजर बैंक के अनुसार - गणित समस्त विद्वानों का सिंह द्वार एवं कुंजी है।

हॉगवेन के अनुसार - गणित हमारी सभ्यता और संस्कृति का दर्पण है।

गैलीलियो के अनुसार - गणित परमेश्वर की भाषा है जिसमें उसने संपूर्ण ब्रह्मांड को लिख दिया है।

जॉन लॉक के अनुसार - गणित एक ऐसी विषय वस्तुु है जो बालक के मस्तिष्क में तर्क और चिंतन का विकास करती है।

हॉब्स के अनुसार - गणित उस पाषाण के समान है जिस पर रगड़ने से अस्त्र-शस्त्र की धार बीच में हो जाती है उसी प्रकार गणित तर्कशक्ति बुद्धि को तीव्र करता है।

गणित अध्ययन की शिक्षण विधियां(Meth Pedagogy)
                      आगमन विधि    -Arrival method

गणित शिक्षण की यहां सबसे प्रारंभिक विधि है जिसके द्वारा एक-एक नियमों को ध्यान में रखते हुए उदाहरण से नियम की ओर आगे बढ़ा जाता है इस विधि में दो मूल पद होते हैं तथा चार सोपान होते हैं। ( Mathematics is the most elementary method of teaching here, by which one moves from one example to the next, keeping in mind the rules. This method has two basic terms and four steps.)

  • आगमन विधि में ज्ञात से अज्ञात की ओर बढ़ा जाता है।
  • आगमन विधि सरल से कठिन की ओर चलती है।
  • आगमन विधि स्कूल से पूछने की ओर आगे बढ़ती है।
  • आगमन विधि विशिष्ट से सामान्य की ओर बढ़ती है।
  • आगमन विधि में विश्लेषण से संश्लेषण की ओर आगे बढ़ा जाता है।
आगमन विधि अंक गणित में अधिक उपयोगी होती है और प्रारंभिक कक्षाओं के बालकों में सरलता पूर्वक गणितीय ज्ञान को प्रदान करने में सहायक होती है।

 इस विधि के द्वारा निम्न प्रकार से सवालों को हल किया जा सकता है।

Q. ₹800 का 3 वर्ष का सरल ब्याज कितना होगा ब्याज दर 10% है?

ANS -     उदाहरण से नियम की ओर
              
           मूलधन× दर×समय    800×10×3
                    100                     100

                           (  240 )ANS

इस प्रकार से सवाल को हल करने पर अंतिम चरण में हमें एक सूत्र का ज्ञान हो जाता है इसी को हम नियम के रूप में जानते हैं।


आगमन विधि के गुण - Properties of arrival method
1.आगमन विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है।
2. आगमन विधि में बालक को स्थाई ज्ञान प्रदान होता है।
3., आगमन विधि तर्क और चिंतन का विकास करती है।
4. आगमन विधि में बालक सक्रिय रहता हे 
defects of arrival method आगमन  विधि के दोष - 
1.आगमन विधि में समय अधिक खर्च होता है। 2.आगमन विधि में प्रतिभाशाली बालकों में निरसता पैदा होती है।
3.आगमन विधि  उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिये अधिक उपयोगी नहीं है।

                     निगमन विधिnIncorporation method  
               
    
गणित शिक्षण में निगमन विधि एक ऐसी विधि है जो प्रारंभिक कक्षाओं से लेकर उच्च कक्षाओं तक विभिन्न प्रकार से उपयोग में लाई जाती है परंतु इसका व्यवहार आगमन के ठीक विपरीत होता है और इसके नियम का सूत्र के माध्यम से आगे बढ़ते हुए समाधान की प्राप्ति या उदाहरण को हल किया जाता है।

  • निगमन विधि कठिन से सरल की ओर आगे बढ़ती है।
  • निगमन विधि अज्ञात से ज्ञात की ओर आगे बढ़ती है।
  • निगमन विधि सामान्य से विशिष्ट की ओर आगे बढ़ती है।
  • निगमन विधि अप्रत्यक्ष से प्रत्यक्ष की ओर आगे बढ़ते हैं।
  • निगमन विधि संश्लेषण से विश्लेषण की ओर आगे बढ़ती है।
  • निगमन विधि सोच मुझे स्कूल की ओर आगे बढ़ती है।

इस विधि से प्राथमिक स्तर पर अंकगणितीय समस्याओं का समाधान सामान्य रूप से जबकि उच्च कक्षाओं में विशिष्ट रूप से प्राप्त किया जाता है अर्थात यह उच्च कक्षाओं में अधिक उपयोगी है इस विधि का उपयोग निम्न प्रकार किया जाता है।

Note - आगमन व निगमन विधि व्यवहारिक दृष्टि से एक दूसरे की पूरक होती हैं जबकि सैद्धांतिक दृष्टि से विपरीत होती हैं।

निगमन विधि के गुण - Merits of incorporation method
1.निगमन विधि मैं समय कम लगता है। 2.पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो जाता है।
3. समस्या का समाधान सरलता से प्राप्त हो जाता है।
4. प्रतिभाशाली बालकों की रुचिकर विधि है, निगमन विधि

निगमन विधि के दोष - Defects of incorporation method
1.निगमन विधि अमनोवैज्ञानिक विधि है।
2. निगमन विधि केवल उच्च कक्षाओं में उपयोगी होती है।
3. निगमन विधि रटने का दोष पैदा करती है, निगमन विधि में ज्ञान अस्थाई होता है।


                      व्याख्यान विधि  Lecture method
व्याख्यान विधि के जनक - प्लूटो 

गणित कक्षा के दौरान एक शिक्षक व्याख्यान विधि के द्वारा की विषय वस्तु को स्पष्ट करने का प्रयास करता है तथा वह पाठ से संबंधित मूल्य इबारत को इसी विधि से बता सकता है। जैसे औसत पाठ पढ़ाते समय औसत क्या होता है और औरत के संदर्भ में कैसे कैसे सवाल होते इसे स्पष्ट करने के लिए व्याख्यान विधि का प्रयोग किया जाता है।

व्याख्यान विधि के गुण - 
1.व्याख्यान विधि में मैं समय व धन कम खर्च होता है।
2. पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो जाता है।
3. बालक में अनुशासन व नियंत्रण पैदा होती है। 4.एक अच्छे श्रोता के गुणों का विकास होता है।

व्याख्यान विधि के दोष -
1.व्याख्यान विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है। 2.बालक निष्क्रिय रहता है बालक की जिज्ञासा शांत नहीं होती है।
3. प्रारंभिक कक्षाओं में वह बालकों के लिए उपयोगी नहीं है।


                     खोज विधि  Search method
खोज विधि के जनक - हेनरी एडवर्ड आर्म स्ट्रांग है।

खोज विधि का दूसरा नाम ह्यूरिस्टिक विधि है। आर्म स्ट्रांग के अनुसार गणित शिक्षण के दौरान एक शिक्षक को चाहिए कि वह बालकों को कम से कम बताएं और ज्यादा से ज्यादा जानने का प्रयास करें खोज विधि के अनुसार ही ह्यूरिस्टिक शब्द का अभिप्राय खोजना होता है। इस विधि का उपयोग करते हुए गणित में सांख्यिकी से संबंधित समस्याओं का समाधान प्राप्त किया जाता है।

खोज विधि के गुण - Search method properties
1.खोज विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है।
2. खोज विधि स्थाई ज्ञान प्रदान करती है।
3. खोज विधि चिंतन और तर्क का विकास करती है।
4. बालक में खोज और अनुसंधान के गुण पैदा करती है।


खोज विधि के दोष Search method properties - 
1.समय अधिक लगता है।
2. प्रतिभाशाली बालकों में नीरसता पैदा करती है।
3. कमजोर बालकों के लिए अधिक उपयोगी नहीं है , प्रारंभिक कक्षा के लिए उपयोगी नहीं है।


                    संश्लेषण विधि   synthesis method

जब गणित शिक्षण के दौरान किसी समस्या का समाधान प्राप्त करने के लिए विषय वस्तु को संक्षिप्त बनाने हेतु या कम से कम समय में निष्कर्षों की प्राप्ति के लिए समस्या के भागों को जोड़ते हुए समाधान का प्रयास किया जाता है तो वह संश्लेषण कहलाता है।

जैसे-  625 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले मैदान के चारों ओर 1 मीटर पहुंचाएगी दीवार बनवाने का खर्चा क्या होगा यदि प्रति मीटर खर्चा ₹360 आता है।

           आप स्वयं हल करें।

संश्लेषण विधि के गुण - Properties of synthesis method
1.पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो जाता है।
 2.बालकों में तर्क और चिंतन का विकास होता है।
3. गणितीय समस्या समाधान शीघ्रता से प्राप्त होता है।
4. बालक में आत्मविश्वास पैदा होता है।

संश्लेषण विधि के दोष - Defects of synthesis method
1.छोटी कक्षाओं एवं कमजोर बालकों के लिए उपयोगी नहीं है।
2. ज्ञान स्थाई नहीं हो पाता इस विधि में सभी बिंदु नहीं पढ़ाए जा सकते हैं रटने का दोष पैदा होता है।

NOTE - कई बार ऐसा भ्रम पैदा हो जाता है कि आगमन निगमन विधि व विश्लेषण और संश्लेषण विधि एक दूसरे से संबंधित हैं या फिर आगमन निगमन की विपरीत होने के तरह यह हम सोच लेते हैं कि विश्लेषण एवं संश्लेषण विधि भी एक दूसरे के विपरीत हैं लेकिन ऐसा नहीं है विश्लेषण संश्लेषण दोनों विधियां अलग-अलग है।



                         विश्लेषण विधि    Analysis method

गणित शिक्षण के दौरान जब क्षेत्रफल या जेमिति यों से संबंधित समस्याओं का समाधान प्राप्त कर रहा होता है तो समस्या का विभाजन सिद्धांत के अनुसार टुकड़ों में वर्गीकरण करते हुए समाधान का प्रयास किया जाता है।

विश्लेषण विधि के गुण -  Properties of analysis method
1.विश्लेषण विधि एक मनोवैज्ञानिक विधि है। 2.विश्लेषण विधि में चिंतन का विकास होता है।

विश्लेषण विधि के दोष - Defect of analysis method
1.विश्लेषण विधि में समय अधिक ख़र्च होता 
2.प्रतिभाशाली बालकों में नीरसता पैदा होती है 3.पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता।



                प्रयोगशाला विधि    Laboratory method
जब गणित में त्रिकोणमिति से संबंधित समस्याएं या अन्य घटनाओं को सिद्ध करना होता है तो वहां पर प्रयोगशाला विधि का उपयोग किया जाता है जैसे सिद्ध करो कि त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों का मान दो समकोण के बराबर होता है।

विधि - सबसे पहले कोई कार्ड शीट कैची पेंसिल पैमाना चांदा जैसी आवश्यक सामग्री ली जाए और फिर प्रत्येक बालक को एक-एक कार्ड शीट बांट देंगे तथा कार्ड सिर पर पैमाना और पेंसिल के सहयोग से चित्रांश और तीन अलग-अलग प्रकार के त्रिभुज बनाएंगे तथा कैची की सहायता से काट लेंगे और चांदी की सहायता से प्रत्येक त्रिभुज के अंतः कोणों का मान करते हुए निष्कर्ष प्राप्त करेंगे।

प्रयोगशाला विधि के गुण -  Properties of laboratory method
1.यह एक मनोवैज्ञानिक विधि है। 
2.तर्क और चिंतन का विकास करती है।
3. बालक को क्रियाशील करती है।
4. स्थाई ज्ञान प्रदान होता है।

प्रयोगशाला विधि के दोष -   Laboratory method faults
1.समय व धन अधिक खर्च होता है।
2. विद्यालयों में सहायक सामग्री का अभाव रहता है।
3. पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाता है।





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आगमन विधि के गुण  आगमन विधि के गुण आगमन वि आगमन विधि के गुणधि के गुण दोस्तोxambaaz.com में आपका स्वागत है, आज के इस आर्टिकल में हम आपके लिए  पर्यावरण अध्य आगमन विधि के गुण यन की शिक्षण अधिगम की विधियां(environment teaching method in hindi)(Teaching Methods of EVS) शेयर कर रहे हैं। इस आर्टिकल में आपको पर्यावरण अध्ययन की सभी विधियों के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार पूर्वक प्राप्त होगी पर्यावरण पेडगॉजी(Evs Pedagogy Notes) के अंतर्गत पर्यावरण अध्ययन की शिक्षण विधियों से भी प्रश्न पूछे जाते हैं।  इसी को ध्यान में रखते हुए इस आर्टिकल में हमने  पर्यावरण अध्ययन की विधियां जैसे प्रक्षेण विधि, खेल विधि, कहानी विधि, अन्वेषण विधि, समस्या समाधान विधि ,परियोजना विधि इन सभी विधियों के बारे में विस्तार पूर्वक इस आर्टिकल में बताया गया है।

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