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Adhigam Ke Pramukh Siddhant अधिगम के प्रमुख सिद्धांत

Adhigam Ke Pramukh Siddhant अधिगम के प्रमुख सिद्धांत 

   

नमस्कार दोस्तों आज हम पढ़ेंगे adhigam ke pramukh siddhant
 अधिगम के सिद्धांत चलिए सबसे पहले जान लेते हैं सिद्धांत क्या है सिद्धांत हमें बताते हैं कथन और कारण दुनिया में जो भी घटना घटती है वह क्यों घटती है किस वजह से घटती है इसका क्या कारण है यह सभी हमें सिद्धांत बताते हैं आज हम पढ़ने वाले हैं अधिगम के सिद्धांत और अधिगम क्यों और कैसे होता है आज हम अधिगम के बारे में सभी चीजें विस्तार से जानेंगे और उनके ऊपर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं। हिंदी आर्टिकल आपके लिए मोस्टट इंपोर्टेंट होने बाला है क्योंकि अधिगम से लगातार परीक्षाओं मेंं प्रश्न पूछेेे जाते हैं।
 adhigam ke pramukh siddhant अधिगम के प्रमुख सिद्धांत 

अधिगम क्या है ?

अधिगम एक ऐसी मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति कुछ ना कुछ नया सीखने का प्रयास करता है अधिगम जीवन पर्यंत चलने वाली एक प्रक्रिया है। बालक जन्म से ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जब तक सीखना जारी रखता है तब तक वह मर नहीं जाता निरंतर कुछ ना कुछ व्यक्ति सीखता ही रहता है। व्यक्ति अपने परिस्थितियों के अनुसार सीखना स्टार्ट करता है कभी तो सीखने की गति तेज होती है कभी सीखने की गति धीमी होती है। अधिगम के द्वारा व्यक्ति अपने व्यवहार में लगातार नए नए परिवर्तन लाता है और अपने आप को बदलने का प्रयास करता है।

अधिगम से तात्पर्य है कि व्यक्ति लगातार अपने अभ्यास एवं अनुभवों के द्वारा अपने व्यवहार में जो परिवर्तन लाता है उसे हम अधिगम कहते हैं।

अधिगम में सबसे पहले मन मे प्रेरणा जागृत होती है उसके बाद व्यक्ति अनुक्रिया कर्ता है। अनुक्रिया करने पर कई बाधाए आती है। और हमें नए नए अनुभव प्राप्त होते हैं उसके बाद लक्ष्य की प्राप्ति होती है।

गिलफोर्ड के अनुसार -     

व्यवहार के कारण व्यवहार में अपनाया गया जो परिवर्तन है उसे हम अधिगम कहते हैं।

क्रो एंड क्रो के अनुसार - 

व्यक्ति की आदत ज्ञान और अभिवृत्ति का जो अर्जन होता है उसे क्रो एंड क्रो ने अधिगम कहा हैं।

गेट्स के अनुसार - 

अनुभव तथा प्रशिक्षण के द्वारा व्यवहार में अपनाया गया जो परिवर्तन है उसे गेट्स ने अधिगम कहा ।

वुडवर्थ के अनुसार - 

नवीन ज्ञान और नवीन प्रतिक्रियाओं का अर्जन करने वाली प्रक्रिया को वुडवर्ड ने अधिगम कहा है।

स्किनर के अनुसार - 

व्यवहार में उत्तरोत्तर अनुकूलन की प्रक्रिया को ही स्किनर ने अधिगम कहा।

अधिगम के सिद्धांत को दो भागों में बांटा गया है ।

1. व्यवहारवादी सिद्धांत            2. संज्ञानवादी सिद्धांत

Note - मनोविज्ञान में सबसे पहले आत्मा का विज्ञान आया उसके बाद मन या मस्तिष्क का विज्ञान फिर चेतना का विज्ञान इस विज्ञान के बाद मनोवैज्ञानिकों ने व्यवहार के विज्ञान को अपनाया व्यवहार के विज्ञान को जो मनोवैज्ञानिक लेकर आए उन्हें हम व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक कहते हैं।


adhigam ke pramukh siddhant अधिगम के प्रमुख सिद्धांत 


व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक - 

1. थार्नडाइक 2. पावलाव 3. बी एफ स्किनर ( व्यूरिस फ्रेडरिक स्किनर ) 4. क्लार्क एल हल

व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिकों की मूल बातें -  adhigam ke pramukh siddhant अधिगम के प्रमुख सिद्धांत 

1.व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक पुनर्बलन, अनुक्रिया, उद्दीपक अभिप्रेरणा, इन पर सबसे ज्यादा बल देते हैं।
2. व्यवहारवादियों के अनुसार अधिगम यंत्रवत होता है मतलब अधिगम पशु व मानव दोनों ही कर सकते हैं।
3. व्यवहारवादियों के अनुसार अधिगम धीरे-धीरे होता है।
4. व्यवहारवादी मानते हैं कि अधिगम अनुबंधन पर आधारित है।
5. व्यवहारवादियो के अनुसार यदि व्यक्ति विभिन्न अनुक्रिया करके उद्दीपक को प्राप्त कर लेता है तो दोनों के मध्य एक बंधन बनता है जैसे हम अनुबंधन कहते हैं इसे व्यवहारवादी ने अधिगम कहा।

Ex - हम किसी भी प्रकार की नौकरी के लिए पढ़ाई करते हैं पढ़ाई करने के पश्चात हमें नौकरी मिल जाती है तो पढ़ाई और नौकरी के मध्य एक बांड स्थापित हो जाता है जिसे हम बंधन कहते हैं और इसे ही अधिगम कहते हैं।

संज्ञानवादी मनोवैज्ञानिक - 

संज्ञान वादी सिद्धांत को हम गेस्टाल्ट वाद संप्रदाय के नाम से जानते हैं गेस्टाल्ट जर्मन भाषा का एक शब्द है गेस्टाल्ट का अर्थ होता है समग्र अर्थात पूर्ण गेस्टाल्ट वादियों ने सुझ पर अधिक बल दिया है कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें व्यक्ति अपने आप सीख जाता है। 

गेस्टाल्टवाद संप्रदाय में चार मनोवैज्ञानिक आते हैं।

1.मैक्स वर्दीमर 2.कोहलर 3.कर्ट लेविन 4.कोफ़्का

संज्ञानवादी मनोवैज्ञानिकों की मूल बातें - 

1.संज्ञानवादी मनोवैज्ञानिक संवेदना, बुद्धि, प्रत्यक्षीकरण, ज्ञान, संज्ञान, समस्या समाधान, इन पर सबसे ज्यादा बल देते हैं।
2. संज्ञानवादी मानते हैं कि अधिगम यंत्रवत नहीं होता मतलब अधिगम सिर्फ मानव ही कर सकते हैं पशु नहीं कर सकते।

3. संज्ञानवादियों के अनुसार अधिगम अचानक होता है।

4. संज्ञानवादियों के अनुसार अधिगम समस्या के समाधान पर आधारित है।

5. संज्ञानवादियों के अनुसार हमारे पास पांच इंद्रियां हैं। आंख, नाक, कान, त्वचा, जीभ इनसे हमें संवेदना मिलती है. संवेदना के बाद प्रत्यक्षीकरण प्रत्यक्षीकरण के बाद संज्ञान संज्ञान के बाद सूझ उत्पन्न होती है और सूझ से समस्या का समाधान होता है।


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